इंदौर.
अब्बा मैं जल्दी लौट आऊंगा.. जमीर का यह वादा लचर कानून-व्यवस्था और गुंडों की दरिंदगी की भेंट चढ़ गया। इसके साथ ही पुलिस के वे सारे अभियान भी खोखले साबित हो गए जो गुंडों से ज्यादा आम शहरियों को सताते हैं। चौराहे-चौराहे होने वाली चेकिंग के दौरान होने वाली गिरफ्तारियों के आंकड़े चाहे बढ़ते जाएं, बढ़ते अपराध नहीं थम रहे। वारदात के बाद हमेशा की तरह अपराधियों को पकड़ने के लिए इनाम और चेहरे की कालिख छुपाने के लिए बहानों के कॉस्मेटिक्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
जमीर परिवार की आंखों का तारा और पिता के बुढ़ापे की लाठी था। वह उनके साथ लैथ मशीन पर हाथ बंटाता था। उसकी मदद से ही परिवार का गुजर-बसर होता था। दुष्टों ने उसे छीन लिया। अल्लाह उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।
जमीर के चचेरे भाई मो. रिजवान, चाचा मो. रमजान, गुल मोहम्मद, अब्दुल गफूर रंगरेज व मो. शफी ने बताया उसके दो भाई समीर व गोलू तथा दो बहनें मीना व पारो हैं। जमीर तीसरे नंबर का था। वह आईके स्कूल में ७वीं में पढ़ता था और पालदा में पिता की दुकान पर लैथ मशीन के काम में हाथ बंटाता था। धुलेंडी पर दुकान बंद थी। रात को भोजन के बाद दोस्तों सलमान और अमजद के साथ टहलने गया था। तब पिता से कहा था जल्द लौटकर आता हूं। कुछ देर बाद सलमान और अमजद मोहल्ले में पहुंचे और बताया बदमाशों ने जमीर को घेर हमला कर दिया है। परिजन मौके पर पहुंचे तो पता चला लोग उसे अस्पताल ले गए। वहां पहुंचे तब तक काफी खून बह चुका था।
बाइक जब्त, दो संदिग्ध हिरासत में
तीन घंटे में आठ वारदातों के बाद पुलिस सकते में आ गई। घटनाएं अहिल्याश्रम से अन्नपूर्णा रोड तक हुई थीं। यह आशंका भी थी कि हमलावर और भी वारदातें कर सकते हैं। तत्काल सभी को घेराबंदी के निर्देश मिले और बाइक सवार तीन लोगों को रोककर पूछताछ की जाने लगी। डेंटल कॉलेज के पास मो. जमीर के हमलावरों की बाइक का नंबर किसी ने पुलिस को बताया था। उसी आधार पर बाइक जब्त कर दो लोगों को हिरासत में लिया गया। जानकार बताते हैं तीनों युवक 20 से 25 साल के थे। उनमें से एक की हेयरस्टाइल अभिनेता सलमान खान से मिलती है।
दो हजार गिरफ्तार, नतीजा सिफर
हर शनिवार कॉम्बिंग गश्त के दौरान 23 मार्च तक 2000 से ज्यादा गुंडे पकड़े जा चुके हैं। फिरभी अपराधों पर कोई नियंत्रण कहीं दिखाई नहीं देता। इसी दौरान विभिन्न धाराओं में 500 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज किए गए। अनेक संदिग्ध वारंटी भी हिरासत में लिए गए।
रंगों से पुते थे हमलावरों के चेहरे
जमीर ने परिजन को बताया पल्सर पर सवार तीन लोगों ने रोका और रुपए मांगे। जेब में रखे 40 रुपए थे छीने फिर वार किया। चेहरे रंगे होने के कारण उनका हुलिया ठीक से देख नहीं सका। दो बजे बाद जमीर की हालत गंभीर होती गई और तीन बजे दम तोड़ दिया।
मौत का नजारा देख बीमार पड़े साथी
बदमाशों ने सलमान और अमजद को मारकर भगाया तब वे काफी सहम गए। वे कुछ दूर तो भागे फिर अंधेरे में छिपकर जमीर पर हमला होते देखते रहे। फिर मोहल्ले में पहुंचे और लोगों को सूचना दी। जमीर की मौत के सदमे से वे इतने सहमे की बीमार हो गए और बात करने की स्थिति में भी नहीं है।
सभी वारदातों में बाइक सवार समान नहीं- एसपी
एसपी अंशुमान यादव के मुताबिक बदमाशों का सुराग मिल गया है और बाइक भी जब्त कर ली गई है। हालांकि सभी वारदातें एक ही गिरोह ने नहीं की। कुछ वारदातों में हमले के अलग कारण और हमलावर सामने आए हैं, जिसका खुलासा जल्द हो जाएगा।