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अब इंतजार उम्मीदों भरी सुबह का

नई दिल्ली. bilalदिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बाहर वक्त जैसे थम गया है। उम्मीदों भरी एक नई सुबह के इंतजार में बिलाल के पिता दिलावर हुसैन एक-एक पल काट रहे हैं।आंखें मूंदकर इबादत में डूबकर वे वक्त को चुनौती दे रहे हैं।

रविवार को पौ फटने से पहले अजान हुई है और ढेर सारी दुआओं के साथ प्रायमरी ऑक्सियोलिसिस से पीड़ित बिलाल को डॉक्टर्स ऑपरेशन थिएटर में ले गए। वहां 22 घंटे में किडनी और लीवर का प्रत्यारोपण होना है।

दिलावर के लिए यह वक्त इसलिए भी भारी है कि पत्नी नसरीन बानो और भाई नासिर भी ऑपरेशन थिएटर में ही हैं। बुलंद इरादों वाली नसरीन बेटे को लीवर दे रही हैं तो नासिर किडनी। किसी परिवार में भावनात्मक प्रेम की ऐसी मिसाल शायद ही देखने को मिले। यह कहते हुए दिलावर हुसैन की आंखें भर आती हैं।

अस्पताल के बाहर इंदौर से आए बिलाल के परिजनों की भीड़ उमड़ी है। उन्हें रविवार की रात भी ऐसे ही काटनी है। डॉक्टर्स थोड़ी-थोड़ी देर में बाहर निकलकर परिजन को तसल्ली दे रहे हैं। लीवर व किडनी एकसाथ ट्रांसप्लांट करने वाले एकमात्र डॉ. अरविंद स्वाइन और पिडियाट्रिशियन डॉ. मोहिनी गिरि सहित 26 डॉक्टर्स और 40 सहयोगी सोमवार सुबह तक ऑपरेशन करेंगे।

चिंता मत कीजिए सब बढ़िया होगा

पांच साल की उम्र से तकलीफ झेल रहे बिलाल में गजब का हौसला है। वह अपनी रिपोर्ट खुद ही पढ़ता है। वह पिता को ढांढस बंधाता है ‘‘फिक्र न करें सब बढ़िया होगा।’’

दादी-नानी भी चाहती थीं लीवर देना

बिलाल की दादी और नानी भी लीवर देने को तैयार थीं लेकिन मां नसरीन अड़ गईं। ऐसे ही दोनों चाचा किडनी देने को तैयार थे।

मीडिया को खबर न दें

यह इस तरह के प्रत्यारोपण का एशिया में दूसरा ऑपरेशन है। अस्पताल प्रशासन का दबाव भी है कि मीडिया को इसकी खबर न दी जाए। इसके चलते बिलाल के परिजन ने बमुश्किल ‘भास्कर’ से चर्चा की।





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