सीमलिया/कोटा.
कोटा-बारां रोड पर सीमलिया के पास रविवार सुबह 11 बजे अनियंत्रित डम्पर के पलटने से एक महिला, एक किशोरी व दो बालकों सहित आठ जनों की मौत हो गई और 31 अन्य घायल हो गए। घायलों में से दो की हालत गंभीर है।
कोटा के निकट खेड़ा जगपुरा गांव के अमरलाल बंजारा ने एक माह पूर्व एक डम्पर खरीदा था। इसी खुशी में उसने रविवार को गांव की पूरी बंजारा बिरादरी के लिए सुल्तानपुर के पास बालाजी के मंदिर में प्रसादी का आयोजन रखा था। चालीस से अधिक लोग डम्पर व एक जीप में सवार होकर मंदिर के लिए रवाना हुए।
वे लोग सीमलिया के निकट ही पहुंचे थे कि वहां बन रहे चार लेन रोड पर पेट्रोल भराने के लिए चालक ने डम्पर को सड़क से नीचे उतारा। पेट्रोल भराने के बाद चालक ने डम्पर को वापस सड़क पर चढ़ाना चाहा।
लेकिन, गति अधिक होने के कारण डम्पर अनियंत्रित होकर लहराने लगा। काफी दूर तक लहराने के बाद डम्पर पलट गया। इससे उसमें सवार कुछ लोग उसके नीचे दब गए और कुछ छिटक कर दूर सड़क पर जा गिरे।
सीमलिया के करीब दुर्घटना होते ही कोहराम मच गया। घायल लोग डम्पर के नीचे फंसे परिजनों को निकालने के लिए पुकार करने लगे। इस बीच राहगीरों व सड़क निर्माण में जुटे लोगों ने मदद की। किसी ने सीमलिया पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर जिला कलेक्टर अभय कुमार, एडीएम सिटी दीपक नंदी, एडीएम प्रशासन राकेश जायसवाल, एडीएम सीलिंग प्रतिभासिंह, न्यास सचिव सोहनलाल शर्मा, उपसचिव बी.एल.यादव, ग्रामीण एसपी डीएस चूड़ावत, एएसपी यादराम फासल, डीएसपी रविन्द्र खींची, एसडीएम नरेंद्र बंसल, एसएचओ कैलाश शर्मा मय जाब्ते के मौके पर पहुंच गए।
घायलों को निजी बसों व अन्य वाहनों की मदद से कोटा महाराव भीमसिंह चिकित्सालय पहुंचाया। डम्पर के नीचे फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की लेकिन, डम्पर सीधा नहीं हो सका। इस पर सड़क निर्माण कर रही कंपनी से क्रेन व जेसीबी भेजने का अनुरोध किया। काफी देर बाद एक जेसीबी मशीन पहुंची, जिसकी मदद से डम्पर को सीधा किया गया। तब तक उसमें फंसे पांच लोग दम तोड़ चुके थे। तीन घायलों ने अस्पताल पहुंचते-पहुंचते रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
मेजबान दूसरे वाहन में
जब डम्पर सवारियों से भर गया तो मेजबान अमरलाल ने जीप ली और खुद अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ उसमें सवार हो गया। जीप डम्पर के आगे-आगे चल रही थी। दुर्घटना की सूचना उन्हें कुछ दूर जाकर मिली तब वे लौटकर आए और मदद में जुट गए।
मदद के लिए उठे हाथ
जिला प्रशासन की ओर से एडीएम दीपक नंदी ने बताया कि सभी मृतकों के आश्रितों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से संसदीय सचिव भवानीसिंह राजावत ने 10-10 हजार रुपए, व्यस्क घायलों को 5-5 हजार, बच्चों को 2-2 हजार तथा जिन दो महिलाओं के पैर कटे उन्हें 10-10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी। प्रशासन को जब पता चला कि मृतक परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो उन्होंने अंत्येष्टि के लिए लकड़ी की व्यवस्था भी कराई। इसी प्रकार शवों को महाराव भीमसिंह चिकित्सालय के मुर्दाघर से खेड़ा जगपुरा गांव भिजवाने के लिए कर्मयोगी दिवंगत संस्था के राजाराम जैन ने वाहनों की व्यवस्था की। आलोक शर्मा ने मृतकों के परिजनों को गांव भिजवाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की।
जिसने सुना वहीं दौड़ पड़ा
घटना की सूचना कुछ ही देर में कोटा व जगपुरा क्षेत्र में फैल गई। कुछ ही देर में घायलों की कुशलक्षेम पूछने के लिए संसदीय सचिव ओम बिरला, भवानीसिंह राजावत, सांसद ललित चतुर्वेदी, पूर्व मंत्री रामकिशन वर्मा, विधायक प्रहलाद गुंजल, कृषि मंडी समिति अध्यक्ष संतोष बैरवा, कैथून पालिकाध्यक्ष योगेन्द्र नंदवाना, कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन, राजकुमार माहेश्वरी, पीसीसी सदस्य पंकज मेहता, बृजेश शर्मा आदि कई जनप्रतिनिधि महाराव भीमसिंह चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने घायलों के उपचार के लिए चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए और मृतकों के आश्रितों को ढांढस बंधाया।
छिन गया बुढ़ापे का सहारा
भंवरलाल (15) और सोनू (16) भाई-बहन थे। दादा परसराम पोते-पोती को खोकर अपना आपा खो चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब उसके बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा। घर में दादी और इनकी मां ही बची थी, जो मजदूरी करके तीन बच्चों को पाल रहे थे। इस परिवार में अब एक ही 5 वर्षीय बेटी सीमा बची है, जिसे छाती से लगाकर मां बिलख रही थी।
पांच भाइयों की कलाई हुई सूनी
पांच भाइयों में एक ही बहन राधाबाई (14) थी, जो भाइयों के दुलार के साथ इतनी बड़ी हुई थी। उसके शव को देखकर ही उसके भाइयों का सब्र का बांध टूट गया। भैया-दूज पर भाइयों से उनकी इकलौती बहन हमेशा के लिए बिछड़ गई। इतना ही नहीं, इस परिवार की एक और नन्ही जान पिंकी (ढाई वर्ष) भी हादसे की शिकार हो गई। एक ही परिवार में बुआ-भतीजी की मौत ने सभी को हिला दिया।
मासूम के सिर से उठा पिता का साया
नन्ही बेटी के सिर से पिता नाथूलाल का साया उठ गया। नाथूलाल के घर में उसकी पत्नी, मां और बड़ा भाई अमरलाल है। नाथूलाल की अर्थी उठते समय उसकी बूढ़ी मां शवयात्रा के सामने लोट गई और उसके बेटे को नहीं ले जाने की गुहार करने लगी। महिलाओं ने उसे संभाला। पत्थर तोड़कर परिवार का पालन-पोषण करने वाला एक आसरा इस हादसे ने छीन लिया।
दुधमुंही बच्ची हुई अनाथ
हादसे में यशोदा (21) अपनी 8-9 माह की बच्ची को अनाथ छोड़ गई। यशोदा पिछले काफी समय से अपने पीहर जगपुरा में ही रह रही थी। उसका ससुराल नीमोदा है। उसकी मृत्यु की खबर सुनकर उसके ससुरालवाले भी एमबीएस अस्पताल पहुंच गए, जहां उसके शव को नीमोदा ही ले जाने को लेकर विवाद हुआ। बाद में समझौता हुआ और यशोदा के शव का अंतिम संस्कार जगपुरा में ही किया गया। उसकी छोटी सी बच्ची भी घायलावस्था में एमबीएस अस्पताल में भर्ती है, जिसे अंदाजा भी नहीं है कि उसकी मां उसे छोड़ कर चली गई।
परिवार हुआ बेसहारा
गंगाराम (30) भी हादसे में चल बसा। उसकी बेटी सोनू जिंदगी और मौत से जूझ रही है। वह पत्नी, तीन बच्चे और बूढ़ी मां को बेसहारा छोड़ गया।
पुत्रों ने खोया पिता का संबल
गणोशराय (45) जगपुरा में ही चौकीदार था, जो बिहार से यहां आकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। उसके साथ उसके दो पुत्र रणधीर राय और संजीत राय भी रहते थे। दोनों पिता के साथ ऑपरेटर थे। गणोश राय की दो बेटियां और पत्नी बिहार में ही रहती हैं, उन्हें सूचना दी गई, लेकिन गरीबी और समय के अभाव के कारण वे नहीं आ सकीं। अब परिवार को संभालने के लिए उनके दो बेटे ही हैं।
वर्ष की सबसे बड़ी दुर्घटना
सीमलिया थाना क्षेत्र में जब से हाइवे को 4 लेन बनाने का काम शुरू हुआ है तब से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। वर्ष 2007 में 25 दुर्घटनाएं हुई जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और 21 जने घायल हो गए। रविवार को हुई दुर्घटना इस वर्ष में अब तक की सबसे बड़ी घटना थी। इससे पूर्व--7 नवंबर07- को इसी हाइवे पर झालीपुरा के निकट ट्रैक्टर-ट्रोली पलटने से 9 जनों की मौत हो गई थी।
गड्ढ़ा बचाने के प्रयास में हुआ हादसा!
डम्पर में सवार कुछ लोगों का कहना है कि सड़क पर काफी बड़ा गड्ढ़ा था। करीब 100 मीटर की सड़क काफी जर्जर हो रही है। हाइवे निर्माण के दौरान दोनों तरफ की सड़क काफी अच्छी बन चुकी है। उस स्थान पर ढलान होने के कारण चालक को गड्ढ़ा नजर नहीं आया। जब वो उसके एकदम नजदीक पहुंचा तब उसे गड्ढ़ा दिखाई दिया। चालक ने डम्पर को उसमें जाने से बचाने के प्रयास में स्टेयरिंग को एक तरफ घुमा दिया और उसी दौरान वो सड़क से नीचे उतर गया। वापस सड़क पर लाना चाहा तो संतुलन बिगड़ गया और डम्पर लहराता हुआ पलट गया।
चालक फरार, मुकदमा दर्ज
घटना के बाद से ही डम्पर का चालक फरार है। सवारियों का कहना है कि घटना के से उसे किसी ने भी नहीं देखा। वहीं डम्पर के मालिक अमरलाल ने चालक केखिलाफ लापरवाही से वाहन चलाकर दुर्घटना करने का मुकदमा दर्ज कराया है। अमरलाल ने चालक का नाम नहीं लिखाया। उसका कहना था कि इस घटना के बाद उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है इस कारण चालक का नाम ध्यान से उतर गया। उसे कुछ दिन पहले ही नौकरी पर रखा था।