नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई सैनिक सैन्य सेवा की वजह से अपंग नहीं हुआ है तो वह विकलांगता पैंशन का हकदार नहीं है। जस्टिस अरिजित पसायत और जे.एम. पांचाल की बैंच ने व्यवस्था दी है कि सेना का कोई व्यक्ति ऐसे लाभ का दावा तभी कर सकता है जब विकलांगता की स्थिति सेवा के दौरान अथवा सेवा देने के कारण बढ़ गई हो या उसके कारण जन्मी हो।
बीमारी की वजह सैन्य सेवा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील मंजूर करते हुए दी। हाईकोर्ट की एकल व डिविजन बैंच ने सेना में सिग्नलमैन रहे सुरिंदर सिंह राठौर को विकलांगता पैंशन देने का आदेश दिया था।
मई 1993 में राठौर के मैक्युलोपैथी से पीड़ित होने का पता चलने पर उन्हें रिटायर कर दिया गया था। यह ऐसी बीमारी है जिसमें आंखों की रोशनी कम होती चली जाती है। जांच के समय राठौर की 30 फीसदी रोशनी कम हो चुकी थी। सेना के मैडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में कहा था कि राठौर की आंखों की स्थिति का कारण सैन्य सेवा नहीं है।
ड्राइवर के ड्राइविंग लाइसैंस के लिए वाहन मालिक जिम्मेदार
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह वाहन मालिक को सुनिश्चित करना होगा कि उसके ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसैंस है अथवा नहीं।
जस्टिस एस.बी. सिन्हा और जस्टिस वी.एस. सिरपुरकर की बैंच ने एक व्यवस्था देते हुए कहा कि वैध ड्राइविंग लाइसैंस न होने की स्थिति में बीमा कंपनी थर्ड पार्टी बीमा दावे का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होगी। मामले के मुताबिक, सुशील कुमार के चलाए जा रहे ट्रैक्टर की टक्कर से तांगा चलाने वाले जयगुरु की मौत हो गई थी।