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यादों में जीने की हसरत

चंडीगढ़. rekhaवक्त का दरिया कभी नहीं रुकता। इसकी रवानगी में जिंदगी के सभी सूत्र हैं। इन्हीं सूत्रों को संजोए हुए मूल का एक नाम है, रेखा। उम्र के करीब 54 पायदान पर पांव रखते हुए अब इस दरिया में आहिस्ता-आहिस्ता थकान भी दाखिल होने लगी है। यह अलग बात है कि उम्र के इस पड़ाव में भी ‘खूबसूरत’ होने का सूत्र अभी तक कायम है।

सदियां फिल्म की शूटिंग के दौरान इस दरिया के सभी सूत्र खुद-ब-खुद पूरी कहानी अपनी जुबानी कहते हुए सुनाई दिए। गुलाबी रंग की सूट-सलवार, मांग में सिन्दूर, माथे पर बिंदिया और कमर तक लटकते बालों में गुथा परांदा..ठेठ पंजाबन की भूमिका में रेखा। परदे की इस भूमिका के बीच जिंदगी की भूमिका रेखा के लिए यहां अहम दिखाई दी।

यही वजह रही कि जिंदगी के सूत्र की बात आते ही उनकी जुबान पर सबसे पहले यही शब्द आए ‘यादों में रहना चाहती हूं। परदे ने कई भूमिकाएं निभाने का मौका दिया, लेकिन असली भूमिका खुद के होने की है। इस भूमिका को न तो किसी की लिखी किताब में बांधने की ख्वाहिश है और न ही खुद की लिखी किताब में..जब तक यह भूमिका है, इसे बखूबी निभाती रहूंगी।’

अध्यात्म के सूत्र ने भी जिंदगी के सूत्र में अपनी जगह बना ली है। लग्जरी कार से शूटिंग स्पॉट तक के सफर ने नंगे पांव दरगाह के भीतर जाकर सांस ली। कुराली के पास इक गांव के भीतर शूटिंग स्पॉट पर बनी दरगाह में रेखा ने आंखें बंद की और सर झुकाकर इस सूत्र को नमन किया। शब्द निकले तो यही ‘जिंदगी में जो कुछ मिला, सब उसी का दिया हुआ है। आगे भी वह अपनी नजर-ए-इनायत बनाए रखे, बस इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए।’

काजल की पतली परत में छुईमुई करती अब उनकी आंखें अपने तरीके से चीजों के अर्थ परिभाषित करने लगी हैं। अचानक निगाह रुकती है और हाथों में पकड़ा कैमरा निगाह की कैद को कैमरे में कैद कर लेता है। कहती हैं ‘खूबसूती का अर्थ बस इतना ही है कि देखने वाले को क्या खूबसूरत लगता है। परदे पर अभी तक स्वीकार किया जाना भी देखने वालों के नजरिए की ही बात है।’

खूबसूरती के इन अर्थो में जीने का अर्थ भी छिपा है। फैन्स की गुजारिश उनके इसी अर्थ को परिभाषित करती है। चंडीगढ़ से गांव की धूल भरी पगडंडियों को पार कर शूटिंग देखने पहुंचे एक डॉक्टर दंपती ने जब उनसे ऑटो ग्राफ की गुजारिश की तो उन्होंने इस अर्थ को परिभाषित भी कर दिया। रेखा ने कहा कि ‘जीने का अर्थ यही प्यार है’ असल में जिंदगी का सबसे बड़ा सूत्र भी यही है। वक्त का दरिया बहता रहता है, इन्हीं सूत्रों के भरोसे!





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