मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए वन विभाग की जमीन पर बनी इमारतों को अवैध घोषित कर डेढ़ लाख लोगों के घरों को अवैध करार दिया है।
हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कह दिया है कि वन विभाग की जमीन पर रहना गैर कानूनी है और इस जमीन पर बनाए गए मकान पूरी तरह से अवैध हैं। गौरतलब है कि मुलुंड और भांडुप इलाकों में करीब डेढ़ लाख लोग वन विभाग की जमीन पर बने मकानों में रह रहे हैं।
हाई कोर्ट ने यह फैसला देते हुए आदेश दे दिया है कि जंगल की जमीन पर कोई निर्माण वैध नहीं होगा। यह निर्माण संजय गांधी नेशनल पार्क के आसपास हुआ है। कुल 120 एकड़ भूमि पर निर्माण होना बताया जा रहा है। हाई कोर्ट के इस फैसले से बोरीवली, मुलुंड, भांडुप के करीब डेढ़ लाख लोग प्रभावित होंगे।
महाराष्ट्र के वन मंत्री बाबनराव पचपुते ने कहा है कि इस जमीन पर बिल्डर निर्माण कर फरार हो चुके हैं और अब अवैध घोषित कर दी गईं इमारतों में रह रहे लोगों के बारे में सरकार विचार कर रही है। वन मंत्री ने कहा कि अभी सिर्फ निर्णय मिला है और अदालत से विवरण मिलने के बाद इस विषय पर कोई कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण संबंधी सारी गलती बिल्डरों की है जिन्होंने तकनीकी आधार का लाभ लेकर यह निर्माण किया।
विवाद की गुत्थी :
एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का कहना है कि यह भूमि निजी जंगल की जमीन है इसलिए यहां किसी भी व्यावसायिक निर्माण को वैध नहीं माना जाना चाहिए। वहीं, बिल्डरों का पक्ष यह है कि सरकार ने इस जमीन के रिकॉर्ड को 1967 से 1991 तक अपडेट ही नहीं किया गया और कागजात के हिसाब से मंजूरी लेने के बाद ही निर्माण किया गया है।
बिल्डरों के मुताबिक यह रिकॉर्ड की खामी है बिल्डरों का कोई कसूर नहीं। बताया जा रहा है कि यह केवल मुंबई नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र का मामला है। ऐसी करीब 900 एकड़ भूमि पर निर्माण किया गया है।