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विरोध की आंधी के बीच रोशन हुई ओलिंपिक मशाल

प्राचीन ओलंपिया. विरोध की आंधी के बीच रोशन हुई ओलिंपिक मशाल विरोध की आंधी के बीच पेइचिंग ओलिंपिक खेलों की मशाल आज जगमगा उठी। हेरा के मंदिर के सामने पुजारन के वेश में अभिनेत्नी मारिया नाफप्लायोटो ने मशाल को रोशन किया लेकिन प्राचीन यूनान के इस ओलिंपिक केन्द्र में समारोह से पहले कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के कड़े पहरे को तोड़ते हुए अंदर घुसने की कोशिश की। बैनर उठाए एक प्रदर्शनकारी पेइचिंग खेलों के प्रमुख लियू की के सामने तक पहुंचने में कामयाब रहा। इससे पहले कि वह कुछ कर पाता उसे पकड़ कर हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने बताया कि 48 साल के इस तिब्बती प्रदर्शनकारी समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।

तिब्बत के निर्वासित लोग अपने क्षेत्न में चीनी सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों के विरोध में समूचे विश्व में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक लगभग 25 प्रदर्शनकारियों ने समारोह में खलल डालने की कोशिश की मगर उन्हें भगा दिया गया। इस उथलपुथल से बेपरवाह लियू ने कहा ‘ यह मशाल चीन के लोगों और समूची दुनिया के लिए रोशनी और खुशी,अमन और दोस्ती तथा उम्मीदों और सपनों का प्रतीक है। ओलिंपिक मशाल 31 मार्च को पेइचिंग पहुंचने के बाद दुनिया भर के पांच माह के सफर पर निकल पड़ेगी। उसे आठ अगस्त से शुरू होने वाले ओलिंपिक खेलों से पहले पेइचिंग वापस लौटना है।

निकोलाइडिस बने पहले मशाल वाहक : 2004 के एथेंस ओलिंपिक में ताइक्वांडो के रजत विजेता यूनान के अलेक्सांद्रस निकोलाइडिस इस मशाल के पहले वाहक बने। छह दिनों तक यूनान में घूमने के बाद इस मशाल को चीन के सुपुर्द कर दिया जाएगा।आईओसी के अध्यक्ष जैक्स रौग ने इस मौके पर उम्मीद जताई कि मशाल को अपने सफर में हर जगह ऐसा माहौल मिलेगा जिसमें वह अपनी भरपूर रोशनी बिखेर सके।





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