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वेतन वृद्धि के बाद ब्याज दरें घटाना मुश्किल

मुंबई. सरकारी कर्मचारियों के वेतनों में करीब 40 फीसदी इजाफे से जहां खपत में वृद्दि होगी, वहीं रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो जाएगा। वेतन वृद्धि से मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ जाएगा और सरकार के राजकोषीय घाटे कम होने का सिलसिला थम जाएगा। रिजर्व बैंक अप्रैल में मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाला है।

मार्गन स्टेनली के अर्थशास्त्रियों की राय है कि सरकार की वेतन और पेंशन की लागत में 2008-09 में 125.61 अरब रुपए का इजाफा हो जाएगा। राज्य सरकारों को भी इसी तरह की वेतन वृद्धियां करनी पड़ सकती हैं। केंद्र व राज्यों की कुल वेतन वृद्धियां तीन साल में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए होगी।

क्या होगा असर:
1. रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कमी करना मुश्किल होगा।
2. राजकोषीय भार बढ़ ऐसे समय बढ़ जाएगा, जब अर्थव्यवस्था में पूंजी का प्रवाह घट रहा है।
3. लोग ज्यादा खर्च कर पाएंगे, जिससे मुद्राप्रसार में इजाफा होगा।

- फिक्की का मानना है कि जिस गति से राजस्व बढ़ रहा है, उसे देखते हुए वेतन वृद्दि से राजस्व घाटा नहीं बढ़ेगा। मुद्रास्फीति भी नहीं बढ़नी चाहिए।
- मार्गन स्टेनली की राय में रिजर्व बैंक के लिए अब ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाएगा।
- एसोचैम की राय में सरकार की आय बढ़ रही है, इसलिए कोई नुकसान नहीं होगा। कर्मचारी ज्यादा उत्पादक साबित होंगे।





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