नई दिल्ली. जब देश का वाहन उद्योग बिक्री में गिरावट से जूझ रहा है, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पंचायतों की शरण ले ली है। वह ग्रामीण इलाके के रईसों के भरोसे बिक्री बढ़ाने की उम्मीद कर रही है।
मारुति ने पिछले सप्ताह गुजरात में राजकोट से 40 किलोमीटर दूर ग्रामीण इलाके गोंडल में स्थानीय पंचायत के जरिए करीब 20 लोगों को कारों की चाबियां सौंपी।
वाहन उद्योग के लिए चालू वित्त वर्ष बिक्री के लिहाज से कुछ खास साबित नहीं हुआ है। कंपनियों को अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए खासा जोर लगाना पड़ रहा है। मारुति ने यह कवायद पिछले साल उस समय शुरू की, जब जगदीश खट्टर ने मारुति की बागडोर संभाली। उन्होंने बिक्री बढ़ाने के लिए कंपनी के कर्मचारी, श्रमिक और खरीदारों को जोड़ने में खासी मशक्कत की।
वित्त वर्ष 2008-09 के बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र की ओर बड़ी मात्रा में धन का प्रवाह बढ़ाने का वादा किया है। इसी के बाद से खट्टर के कार्यकाल में शुरू हुई पंचायत योजना गति पकड़ने लगी है। मारुति के सेल्स व मार्केटिंग के एक्जीक्यूटिव अधिकारी मयंक परीख का कहना है कि कंपनी मंदी के दौर से निपटने के लिए पूरा ध्यान अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिक्री बढ़ाने पर लगा रही है।
‘पंचायत योजना’
योजना के तहत कंपनी पंचायत सदस्यों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मचारियों, नंबरदारों और तहसीलदारों को मारुति 800 पर 5,000 रुपए और ऑल्टो, वेगन-आर, जेन एस्टिलो पर 2,000 रुपए की छूट दे रही है।
मारुति पिछले साल अप्रैल से अब तक 23,000 से अधिक कारें बेच चुकी है। उसने अपनी ग्रामीण डीलरशिप में भी बढोतरी की है।