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आज तक दूर नहीं हुई पांचवें आयोग की विसंगतियां

जयपुर. चौथे व पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को राज्य में देरी से लागू किया गया। इसके बावजूद काफी विसंगतियों है, जिन्हें दूर नहीं किया जा सका। कर्मचारी संगठनों की ओर से कई आंदोलन किए गए। इसके बाद सरकार ने वेतन विसंगतियों के निराकरण के लिए कमेटियां बनाईं। यतींद्र सिंह कमेटी, आरपी जैन कमेटी, एनएन गुप्ता कमेटी ने सभी कर्मचारी संगठनों की सुनवाई कर ली, लेकिन विसंगतियों को दूर नहीं किया जा सका।

>> क्या हैं विसंगतियां

अधीनस्थ कर्मचारियों के 182 से ज्यादा पदनाम कैडरों को आज तक चौथे व पांचवें वेतन आयोग का पूरा लाभ नहीं मिला है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पीएचईडी के तकनीकी कर्मचारियों के 1108 दिन के धरने को यह कह कर तुड़वाया था कि अधीनस्थ कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को शीघ्र दूर कर दिया जाएगा, लेकिन आज भी इसके लिए तकनीकी कर्मचारी संघ संघर्ष कर रहे हैं।

पांचवें वेतन आयोग को लागू करने की तिथि व इसके तरीकों को लेकर विवाद। एक जनवरी 2004 को महंगाई भत्ता मर्ज हो गया था, जबकि राज्य सरकार ने इसे डेढ़ साल बाद लागू किया। शिक्षकों को १९९८ में हुए समझौते के बावजूद केंद्र के समान चयनित व वरिष्ठ वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया। केंद्र की तर्ज पर एलटीसी का लाभ नहीं। समर्पित अवकाश पर रोक। अब जाकर उपार्जित अवकाश लागू किया।

>> केंद्र व राज्य सरकार में बोनस एक समान है।
>> एलटीसी की जगह राज्य में उपार्जित अवकाश दिया जा रहा है।
>> राजस्थान में कुछ 22 ग्रेड और तीन स्पेशल अलग ग्रेड है।
>> प्रत्येक वेतन आयोग संस्थापन खर्च कम कर पद समाप्त करने पर जोर दिया जाता है।
>> 9,18, 27 का चयनित वेतनमान केवल राजस्थान में लागू है।
>> राज्य में पदनाम में फर्क होने से सभी कैडर के कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है।





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