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लोगो बदलने के पीछे मंशा क्या?

जयपुर. पर्यटन विभाग का लोगो पिछले कुछ समय में तीन बार बदला जा चुका है। मजेदार बात ये है कि नए लोगो में राजस्थान कहीं नहीं झलकता। विभाग के अधिकारी कहते हैं कि ये मुख्यमंत्री स्तर का फैसला है, इसमें वे क्या कर सकते हैं। काफी साल तक पर्यटन विभाग का लोगो ‘पधारो म्हारे देस’ इतना लोकप्रिय था कि वह राजस्थान का प्रतीक हो चुका था। इसमें रेगिस्तान में ऊंट पर ढोला-मारू बैठे थे। यह एक पाती (पत्र) पर बना था जो निमंत्रण का प्रतीक था।

इसके बाद विनोद जुत्शी के पर्यटन विभाग के प्रमुख शासन सचिव बनने पर लोगो बदलकर ‘कलरफुल राजस्थान’ कर दिया गया, जिसमें एक महिला नृत्य कर रही थी। कुछ समय बाद उसे भी बदलकर ‘राजस्थान द इनक्रेडिबल स्टेट ऑफ इंडिया’ लाया गया, जिसमें आधुनिक डिजाइन है। इससे राजस्थानी संस्कृति की कहीं कोई पहचान जाहिर नहीं होती।

पर्यटन से जुड़े सूत्रों के अनुसार कुछ निजी उपक्रमों को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया है, जबकि अधिकारी इस विषय पर कुछ कहने से बचते हैं। पर्यटन विभाग की अतिरिक्त निदेशक उर्मिला राजोरिया से जब लोगो बदलने के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था यह मुख्यमंत्री के स्तर का फैसला है। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकती।





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