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मरता क्या न करता

बीकानेर. बीकानेर विश्वविद्यालय के नियमित विद्यार्थियों की परीक्षाएं 13 मार्च से शुरू हुई थी और बीकानेर संभाग के विभिन्न जिलों से आए करीब 80 छात्र-छात्राएं 12 मार्च को बीकानेर में कार्यक्रम में व्यस्त थे। जैसे ही कार्यक्रम खत्म हुआ, सभी अपने घरों के लिए जैसे दौड़ पड़े।

परीक्षा से पहले कोई भी कार्यक्रम हो, विद्यार्थी कन्नी काट लेता है लेकिन यह कार्यक्रम कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय स्तर का था। ऐसे में मन मारकर इसमें भागीदारी निभानी पड़ी। परीक्षा की चिंता इन छात्र-छात्राओं के चेहरे पर साफ दृष्टिगत हो रही थी। यह कार्यक्रम करीब एक महीने पहले ही होना था, लेकिन संबंधित कॉलेज ने ऐन मौके पर हाथ खींच लिया और गले की घंटी लटक गई राजकीय विधि कॉलेज के मत्थे।

>> ..आखिर इनकी तो सुनो

बीकानेर विवि के एमफिल विद्यार्थियों की स्थिति अजीब बनी हुई है। गत अगस्त में सत्र शुरू हुआ था और नियमानुसार जून तक निर्धारित समय अवधि पूरी हो जाएगी लेकिन विवि के एक पदाधिकारी अक्टूबर में इसकी परीक्षा करवाने पर तुले हैं, जबकि विवि के सुप्रीमो की मंशा जल्दी की है। ऐसे में एमफिल के करीब 450 छात्र-छात्राएं फुटबाल बने हुए हैं। देखें कौन गोल करता है।

>> आहट मात्र से हड़कंप

डूंगर कॉलेज और एमएस कॉलेज में विगत कई महीनों से एक समानता है। हालांकि पहले तक ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन डूंगर कॉलेज में छात्र निधि के दुरुपयोग और एमएस कॉलेज में छात्राओं की फीस जेब में रखने के प्रकरण के बाद जैसे ही कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय से कोई आता है, दोनों ही कॉलेजों में हड़कंप मच जाता है। इस बार जब संयुक्त निदेशक बीकानेर आए तो दोनों ही कॉलेजों के प्रबंधन के होश फाख्ता थे। सभी ने राम-राम जपते हुए संयुक्त निदेशक को विदा किया।

>> दिल के अरमान

आखिर राज्य सरकार ने अगले सत्र से छात्रसंघ चुनाव कराने पर अपनी सहमति जता दी लेकिन सहमति जताने में हुए विलंब ने उन भावी छात्रनेताओं के अरमानों पर पानी फेर दिया जो चुनाव लड़ने के लिए ही कॉलेज पहुंचे थे। सभी को उम्मीद थी कि देर-सवेर इसी सत्र में चुनाव होंगे, इसलिए आनन-फानन में एडमिशन ले लिया। अब तो अगले सत्र तक फिर इंतजार करना ही होगा।





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