बीकानेर. मुख्यमंत्री के अगस्त में प्रस्तावित बीकानेर दौरे को देखते हुए विकास कार्य किए जा रहे हैं लेकिन परिषद को अभी तक सरकार ने बजट की स्वीकृति नहीं दी है। जबकि विकास के पेटे होने वाले कई कार्यो में परिषद की भूमिका अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए राज्य सरकार ने नगर परिषद क्षेत्र को विकास कार्यो की सूची तो थमा दी है लेकिन हैरानी की बात है कि परिषद के बजट को अभी तक लंबित रखा है। बहुमत के अभाव में नगर परिषद के बजट को पास नहंी करवाया जा सका था और उसे राज्य सरकार के पास भेज दिया गया है। इस बात को एक महीने से अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक स्वायत शासन मंत्री की ओर से इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
बजट के अभाव में बीकानेर का विकास ठप हो चुका है। कई कार्यो के ठेके हुए थे और काम भी शुरू हो चुके थे लेकिन वे अब अटक गए हैं। नगर परिषद सभापति को दस लाख रुपए तक विकास कार्यो के लिए खर्च करने की शक्ति है लेकिन बजट की स्वीकृति के बिना इस आधार पर भी विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं।
परिषद में कांग्रेस का बोर्ड है, ऐसे में कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार जानबूझ कर बजट को अटकाए रखना चाहती है। इसका खमियाजा बीकानेर की आम जनता को उठाना पड़ रहा है। कही नालियों नहीं बनी तो कहीं सड़कें अधूरी है। गत दिनों जयपुर में जब मुख्यमंत्री के सामने जिला प्रशासन, नगर विकास न्यास और नगर परिषद के अधिकारियों ने प्रजेंटेशन दिया था तो उस समय परिषद क्षेत्र में विकास कार्य के लिए लंबी सूची थमा दी गई थी। ऐसे में परिषद के अधिकारी भी परेशानी में है कि आखिर विकास कार्य के लिए धन कहां से लाएं।
परिषद के सभापति मकसूद अहमद ने बताया कि एक तो मुख्यमंत्री बीकानेर के विकास के लिए लगातार घोषणाएं कर रही हैं वहीं दूसरी ओर परिषद के बजट को अभी तक स्वीकृति नहीं दी गई है। भाजपा के बोर्ड के समय भी ऐसी ही स्थिति बनी थी मगर उस समय तो राज्य सरकार ने आनन-फानन में स्वीकृति भी दे दी थी। अब चूंकि कांग्रेस का बोर्ड है, ऐसे में भेदभाव किया जा रहा है। बजट नहीं मिलेगा तो बीकानेर में विकास कार्य ठप हो जाएंगे।