बीकानेर. भाजपा सरकार राज्य में समरसता और भाईचारे को चौराहे पर लाकर राजनीति कर रही है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री अश्क अली टाक ने यह आरोप सोमवार को सर्किट हाउस में एक पत्रकार सम्मेलन में लगाया। यहां एक निजी कार्यक्रम में आए टाक ने चित्तौड़ की घटना को लेकर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना ऐसे समय हुई है, जब जयपुर में विधानसभा सत्र चल रहा है। शासन और प्रशासन ऐसे समय में अधिक सतर्क रहता है।
एक ही दिन चार त्योहार एक साथ होने के कारण चित्तौड़ के जिला प्रशासन को अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए थी। कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन यदि पहले से ही चौकन्ना रहता तो इस घटना को रोका जा सकता था।
घटना के बाद बाकी कसर सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों ने अपने बयान देकर पूरी कर डाली। इस घटना में सरकार का उत्तरदायित्व नकारा सिद्ध हुआ है। राज्य में गुर्जर और किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए टाक ने कहा कि राज में आने से पहले वसुंधराराजे द्वारा दिए गए आश्वासनों के कारण ही पांच साल से प्रदेश में जातीय संग्राम की स्थितियां बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने पहले जातिगत व आरक्षण की राजनीति की और अब चुनाव से पहले राजस्थान को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री हर घटना पर चुप्पी साधे रही है।
सीटों का मूल्यांकन शुरू
राजस्थान में विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने परिसीमन के हिसाब से सीटों का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। अश्क अली टाक ने बताया कि परिसीमन में सीटें एक भी नहीं बढ़ी लेकिन प्रदेश की भौगोलिक व राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, अभी यह तय नहीं हो सकता है कि किस जाति वर्ग के कितने व्यक्तियों को टिकट दी जाए। पिछले चुनाव में 16 अल्पसंख्यक, 35 ब्राrाण, 33 जाट, 14 राजपूतों को टिकट दी गई थी। अप्रैल में नए परिसीमन के हिसाब से मतदाता सूचियों का प्रकाशन होगा। इसलिए सीटों का मूल्यांकन दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए अहम मुद्दा है। कांग्रेस अपनी तैयारियों में जुट गई है।
आयातित नेताओं की सरकार
अश्क अली टाक ने भाजपा को आयातित नेताओं की सरकार बताया है। सरकार की कार्य प्रणाली पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि राजेन्द्र राठौड़, सांवरलाल जाट, दिगंबर सिंह सहित कई ऐसे मंत्री इस राज में पावरफुल हैं, जिनका इतिहास भाजपा का नहीं था। यही कारण है कि सरकार और संघ की विचारधारा अलग-अलग रही। आरएसएस के नेताओं को अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ आंदोलन करने पड़े हैं।
कांग्रेसी नहीं जुट सके
सर्किट हाउस में अश्क अली टाक की अगवानी में कांग्रेसी नेताओं की कमी खली। शहर व देहात कांग्रेस का कोई पदाधिकारी मौजूद नहीं था। सर्किट हाउस में यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष भंवरसिंह भाटी, युनूस खां, पार्षद हारुन राठौड़, फूसराज गहलोत के अलावा इक्का-दुक्का कार्यकर्ता ही मौजूद थे। देहात कांग्रेस के एक पदाधिकारी का कहना था कि पार्टी का कोई कार्यक्रम नहीं था और न ही टाक के आने की पूर्व सूचना दी गई।