बीकानेर.
ईस्ट-वेस्ट विश्वविद्यालय, शिकागो के संस्थापक व आजीवन ट्रस्टी शेर मोहम्मद एक सप्ताह की यात्रा पर भारत आए हुए हैं। बीकानेर के मूल निवासी मोहम्मद ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि भारतीयों में शिक्षा का भंडार है लेकिन उनमें कार्य की गति बहुत धीमी है।
ईस्ट-वेस्ट विश्वविद्यालय ऑफ शिकागो के संस्थापक व आजीवन ट्रस्टी शेर मोहम्मद का कहना है कि विदेशों में भारतीयों की गुणवत्ता को परखा जा रहा है और वे इस पर खरे उतर रहे हैं। शिक्षा व ज्ञान का भारतीयों में भंडार है लेकिन कार्य की धीमी गति उनके आगे बढ़ने में अवरोधक है। बीकानेर के रिडमलसर गांव के मूल निवासी शेर मोहम्मद भारत की यात्रा पर आए हुए हैं।
सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईस्ट-वेस्ट विश्वविद्यालय में गरीब और बेसहारा छात्रों को शिक्षा दी जाती है। एशियाई देशों के उन छात्रों को तवज्जो मिलती है जो पढ़ने में तेज हैं लेकिन उनके पास धन की कमी है। उन्होंने कहा कि विवि में आवेदन के बाद प्रथम वर्ष प्रत्येक विद्यार्थी को फीस जमा करनी पड़ती है लेकिन उसके आगे विद्यार्थियों के अंकों के आधार पर उसकी फीस माफ की जाती है। इसके अलावा विवि में स्कॉलरशिप भी शुरू की गई है। इसके लिए पांच लाख डालर की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने बताया कि अभी विवि में साइंस व कला में 122 फैकल्टी हैं।
विवि में 2500 विद्यार्थी हैं। यहां प्रवेश पाने वाले छात्रों को कम्प्यूटर का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा कल्चर इत्यादि के लिए भी अतिरिक्त सुविधाएं हैं। डॉ.शेर मोहम्मद इंडो-अमेरिकन सेंटर के निदेशक भी हैं। इसमें 19 ट्रस्टी हैं। 1992 में स्थापित यह सेंटर एशियाई देशों के विद्यार्थियों को तालीम देने में सहायता करता है।
उन्होंने बताया कि अनुसंधान कार्यो के लिए भारतीय व शिकागो के छात्रों के आदान-प्रदान की पूरी छूट है। भारत से कोई भी छात्र रिसर्च के लिए वहां जा सकता है। इसमें शिकागो के कुछ फाउंडेशन भी मदद करते हैं। पत्रकारवार्ता में रमजान मुगल, डॉ.अबरार सहित कई लोग उनके साथ थे।
सीनियर सिटीजन के लिए विशेष सुविधा
ईस्ट-वेस्ट विश्वविद्यालय, शिकागो के संस्थापक शेर मोहम्मद ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से एशिया के सभी देशों के उन बुजुर्गो के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की गई हैं जो घरों में अकेले रहते हैं। ऐसे बुजुर्गों के लिए चार बसें खरीदी गई हैं और उन्हें प्रति दिन एक जगह एकत्र किया जाता है। दिन भर उनके लिए मनोरंजन के साधन व भोजन की व्यवस्था की जाती है। शाम को बुजुर्गो को उनके घर छोड़ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट भविष्य में बुजुर्गो के लिए फुल सर्विस ऑफ सीनियर सिटीजन केन्द्र खोलने का विचार बना रहा है।