अजमेर. राजस्थान लोक सेवा आयोग की इंटरव्यू प्रक्रिया की गोपनीयता पर अंगुली उठने के आसार बन गए हैं। इसकी वजह मानी जा रही है-आयोग के अध्यक्ष सीआर चौधरी की अध्यक्षता वाले एक मात्र बोर्ड का इंटरव्यू लेना। राज्य सरकार ने बाकी पांच सदस्यों में से किसी की भी नियुक्ति नहीं की है।
आयोग के इतिहास में पहली बार अभ्यर्थियों को यह पहले से ही मालूम है कि उनके इंटरव्यू बोर्ड का चेयरमैन कौन है। चौधरी ने पांच फरवरी से इंटरव्यू बंद कर दिए थे। इसके पीछे मुख्य कारण आखिरी सदस्य विनोदबिहारी शर्मा का छह फरवरी को सेवानिवृत्त होना था। चौधरी खुद 26 फरवरी को सेवानिवृत्त होने वाले थे।
राज्य सरकार ने चौधरी का कार्यकाल बढ़ा दिया तो उन्होंने तीन मार्च को कॉलेज शिक्षा विभाग के व्याख्याता (रसायन शास्त्र, प्राणी शास्त्र और भू गर्भ शास्त्र) के इंटरव्यू की तारीखें इस उम्मीद में तय कर दीं कि सरकार तब तक आरपीएससी में किसी न किसी सदस्य को तैनात कर देगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। नतीजतन, चौधरी को अकेले ही इंटरव्यू लेने पड़े। सोमवार को व्याख्याता रसायन शास्त्र के इंटरव्यू शुरू हुए। 29 मार्च तक और फिर 31 मार्च व एक अप्रैल को सुबह साढ़े 9 बजे से व दोपहर दो बजे से प्रतिदिन इंटरव्यू लिए जाएंगे। दो अप्रैल को अंतिम दिन सुबह साढ़े 9 बजे से इंटरव्यू होंगे।
आरपीएससी में सदस्यों के बाकी पांचों पद खाली पड़े हैं। हालांकि आरपीएससी के संविधान में सिंगल बोर्ड के गठन को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सामान्यत: गोपनीयता की दृष्टि से एक से अधिक बोर्ड बनाए जाते हैं, ताकि अभ्यर्थियों को यह पता नहीं चले कि उनका इंटरव्यू कौन ले रहा है। अध्यक्ष चौधरी इंटरव्यू बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्होंने सहयोगी के रूप में आरपीएससी के पूर्व सदस्य एचएएस जाफरी को सदस्य बनाया है। एक विषय विशेषज्ञ भी लिया गया है।