इंदौर.
इंदौर की युवा फिल्म निर्माता स्नेहा गौड़ की फिल्म ‘अदृश्य नारी’ को मुंबई में हुए अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में नॉन फिक्शनल कैटेगरी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का अवॉर्ड दिया गया। स्नेहा को यह फिल्म बनाने का आइडिया धार के नरलाय में एक स्कूल की विजिट के दौरान आया। जब स्नेहा स्कूल पहुंची तो वहां का दृश्य उनके लिए अकल्पनीय था। वहां बढ़िया स्कूल था जिसमें बच्चे पढ़ाई में तल्लीन थे।
किसी गांव के स्कूल में यह दृश्य अमूमन देखने को नहीं मिलता। स्नेहा ने बताया इंदौर के एक व्यवसायी भास्करभाई पटेल वहां लड़कियों का स्कूल चला रहे हैं, इसमें १२क्क् छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन दिनों यूएसए से मेरी बहन सोनिया आई हुई थी। मैंने सारी बातें उसे बताई और हमने फिर वहां विजिट की और स्क्रिप्ट लिखकर दो दिन में तैयारियां कीं।
महिला सशक्तिकरण की थीम लेकर हमने फिल्म बनाई और मुंबई के उषा प्रवीण गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह सिक्स्टी नाइन में भेजा। फेस्टिवल में स्वीडन और मिस्र सहित विभिन्न देशों की 150 प्रविष्टियां आई थीं और तीन वर्गो में बांटा गया था। एड, फिक्शन और नॉन फिक्शनल फिल्म्स। स्नेहा को दु:ख है कि वे मां की तबीयत खराब होने से पुरस्कार लेने नहीं जा सकीं। उनकी जगह पिता डॉ. आर.के. गौड़ ने पुरस्कार लिया। निर्णायक ख्यात फिल्मकार मधुर भंडारकर और अशोक पंडित थे। पुरस्कार वितरण आमिर खान ने किया।