इंदौर. राज्य सरकार की एजेंसी एमपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कापरेरेशन (एमपी एग्रो) के माध्यम से सिंचाई उपकरणों की खरीदी भारी अनुदान के बाद भी किसानों को महंगी पड़ रही है। इसके लिए बाजार भाव से दोगुना से भी ज्यादा दाम चुकाना पड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसान पंचायत में 25 से 50 फीसदी सब्सिडी की घोषणा की थी।
इंदौर जिले के सनावदिया, आगरा, उमरिया, दुधिया व अन्य गांवों के किसानों ने पीवीसी पाइप व अन्य सिंचाई उपकरणों की खरीदी के लिए ग्रामसेवक के माध्यम से एमपी एग्रो के कोटेशन मंगवाए। तब पता चला बाजार में 110 एमएम का 20 फीट का फिनोलेक्स पीवीसी पाइप 590 रुपए में मिल रहा है जबकि कोटेशन 819 रुपए के आए। मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक 15 हजार रुपए या खरीदी का 50 प्रतिशत जो भी कम हो कि सब्सिडी दी जाएगी। एमपी एग्रो से तीन कंपनियां अधिकृत हैं लेकिन फिलहाल फिनोलेक्स ही सप्लाय कर रही है।
यह है प्रक्रिया- जो किसान सब्सिडी चाहता है वह ग्रामसेवक के माध्यम से उपसंचालक, कृषि के नाम आवेदन करता है। इसके साथ खसरे की नकल भी लगाई जाती है। ग्रामसेवक किसान को कोटेशन देता है। फिर उसकी रिपोर्ट पर ही सब्सिडी मंजूर होती है और कोटेशन के मुताबिक उपकरण किसान खरीदता है।
भाव बाजार में और सरकारी
पाइप- बाजार भाव- कोटेशन
110 एमएम - 590 - 819
90 एमएम - 412 - 572
75 एमएम- 300 - 404
(सभी भाव रुपए में 20 फीट पाइप के लिए)
किसान संघ का विरोध
किसान संघ के प्रांतीय मंत्री पोपसिंह नागर व प्रवक्ता जगदीश रावलिया ने कहा सब्सिडी किसानों को मिलने के बजाय भ्रष्ट अफसरों की जेब में जा रही है और सरकार की छवि धूमिल हो रही है। सब्सिडी सीधे किसानों को मिलना चाहिए।
किसान बाध्य नहीं
* तीन कंपनियों के रेट हमारे पास आए हैं। किसान इन्हीं से खरीदी के लिए बाध्य नहीं हैं। एमपी एग्रो रेट इसलिए तय करती है कि बाजार भाव नियंत्रित रहे। हमारे भाव ऊंचे होने के बाद भी किसान को फायदा है क्योंकि क्वालिटी का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- सूरज खंडेलवाल, जिला प्रबंधक, एम.पी.एग्रो
कम होती जा रही है बिक्री
एम.पी. एग्रो के आंकड़े बताते हैं किसानों का भरोसा उस पर कम हो रहा है। तीन साल में 409 किसानों को कृषि उपकरण दिए गए।
वर्ष - स्पिंकलर- पाइप
2005-06- 43- 151
2006-07- 43- 71
2007-08- 45- 56
जाहिर है आंकड़ा साल-दर-साल घट ही रहा है। अधिकारी बताते हैं इसका कारण व्यावसायिक प्रतियोगिता है।