जोधपुर. रेलवे डाक सेवा का गत एक मार्च से मेल बिजनेस नामकरण नहीं हो सका। डाक विभाग के कर्मचारियों के विरोध के कारण अब यह नामकरण खटाई में पड़ गया है।
डाक विभाग के निर्णय अनुसार देश भर में इस रेलवे डाक सेवा के 450 से ज्यादा कार्यालयों के नाम बदलने की कवायद पूरी हो चुकी थी। इनमें राजस्थान की 14 शाखाएं शामिल हैं। यह योजना लागू करने पर डाक विभाग के कर्मचारियों ने इस निर्णय को रेलवे डाक सेवा को बंद करने की कोशिश बताते हुए इसका विरोध किया जिसके चलते नाम बदलने की इस प्रक्रिया को अभी रोक दिया गया है।
डाक विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि डाक सेवा तेजी से फैलती जा रही है। अब डाक की ढुलाई हवाई जहाज के साथ ट्रकों से भी हो रही है । ऐसे में चूंकि रेलवे डाक सेवा का स्वरूप बिजनेस के अनुरूप हो गया है, इसलिए इसका नाम बदलकर मेल बिजनेस किया जाना था।
>> 150 वर्ष पुराना है नाम
भारत में सन 1833 में लार्ड वेटिंग के शासनकाल में डाक सेवाएं अस्तित्व में आई। 1854 में इसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने डाक विभाग का दर्जा दे दिया। 1873 में रेलवे डाक सेवा की शुरुआत हुई।
>> डाक कर्मियों की यूनियन नाराज
नाम बदलने के निर्णय से डाक विभाग यूनियन नाराज है। यूनियन पदाधिकारियों उनका कहना है कि आज भी 90 प्रतिशत डाक की ढुलाई रेल से की जाती है। ऐसे में नाम बदले जाने के बाद रेलवे को डाक ढुलाई के एवज में दी जा रही रियायत खत्म की जा सकती है। इससे विभाग को खासा घाटा उठाना पड़ सकता है।
डाक विभाग ने गत एक मार्च को रेलवे डाक सेवा का नाम बदलकर मेल बिजनेस करने का निर्णय लिया था, लेकिन कर्मचारी यूनियन के विरोध के चलते नाम बदलने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है।
—एसएन जोशी, सहायक अधीक्षक, रेलवे मेल सर्विस,जोधपुर