कोटा.
छठे वेतन आयोग ने सोमवार को वित्त मंत्रालय को अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं। रेल कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने इन सिफारिशों को अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं बताया है। उनका कहना है कि आयोग ने दोनों फेडरेशनों की रेलकर्मियों के एक बच्चे को नौकरी देने के बारें में अपनी सिफारिशों में कुछ नहीं कहा है।
इसी प्रकार आयोग ने ग्रुप डी के कर्मचारियों के लिए जितने वेतनमान की मांग की गई थी। उतना देने के बारे में सिफारिश नहीं की है। साथ ही ग्रुप डी की तीन श्रेणियों जिनमें न्यूनतम योग्यता आठवीं पास थी। उन श्रेणियों को दूसरी श्रेणियों में मर्ज करके कम पढ़े लिखे लोगों के लिए नौकरी के दरवाजे बंद करने का प्रयास किया है। सिफारिशों में इन्टरनल एडजेस्टमेंट करके कर्मचारियों को छलने का प्रयास किया गया है।
>> कर्मचारी नेता लाभ-हानि का पता लगाने में लगे रहे
रेलकर्मचारी नेता सोमवार को छठे वेतन आयोग की सिफारिशों से रेलकर्मियों को होने वाले लाभ-हानि का पता लगाने में दिनभर व्यस्त रहे। यहीं हालत पेंशनरों की रही। कर्मचारी भी आयोग की सिफारिशों से होने वाले लाभ के बारे में आपस में चर्चा करते रहे।
>> क्या कहते हैं रेल कर्मचारी नेता
कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए केन्द्र सरकार की नौकरी के दरवाजे बंद करने का प्रयास किया गया है। इससे देश में बेरोजगारी बढ़ेगी। आयोग की सिफारिशों में इन्टरनल एडजेस्टमेंट ज्यादा किया गया है।
—मुकेश गालव, अध्यक्ष एम्पलाइज यूनियन जोनल
आयोग की सिफारिशों में बढ़ती हुई मंहगाई का ध्यान नहीं रखा गया है। रेलकर्मियों को दस वर्ष में आने वाले आयोग से कई उम्मीदें थीं लेकिन, सिफारिशों में रेलकर्मियों के लिए कुछ विशेष नहीं हैं।
—एस.के.भार्गव, महामंत्री एम्पलाइज यूनियन सहायक
रेलकर्मियों ने आयोग से जो अपेक्षाएं की थी, सिफारिशें उसके अनुरूप नहीं हैं। पांचवें वेतन आयोग की तरह छठे वेतन आयोग की सिफारिशों में भी राजपत्रित व अराजपत्रित कर्मचारियों के वेतनमान में काफी अंतर रखने की सिफारिश की गई है।
—एच.एल.गांधी, मंडल सचिव मजदूर संघ
आयोग की सिफारिशें कर्मचारियों के हित में नहीं हैं। उच्च वर्ग के कर्मचारियों को निजी क्षेत्र में जाने से रोकने की नाकाम कोशिश की गई है।
—सी.एम.उपाध्याय, मंडल अध्यक्ष,मजदूर संघ