News
Metros
Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. नगर निगम से रिटायर्ड चीफ इंजीनियर केबी शर्मा से मुझे कई बार धमकियां मिलीं। यह बयान एसडीओ एके डढवाल ने सोमवार को एडीशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज राज राहुल गर्ग के सामने दिए। डढवाल ने कहा कि सुरक्षा मुहैया करवाने के लिए उन्होंने आईजी को भी लिखा है।
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में हुए चर्चित जयरथ किक बैक केस में सोमवार को डढवाल और रिटायर्ड एसडीओ जोगिंदर शर्मा ने अपने बयान दर्ज कराए। जोगिंदर शर्मा के गवाही से मुकरने पर कोर्ट ने उन्हें होस्टाइल डिक्लेयर (मुकरा हुआ गवाह) कर दिया।
डढवाल ने अपने बयान में कहा कि नगर निगम से रिटायर्ड चीफ इंजीनियर केबी शर्मा के पास मामले के आरोपी दिनेश शर्मा, सुरेश शर्मा और सुनील कालिया सप्लाई ऑर्डर और पेमेंट लेने आते थे। डढवाल ने कहा, एक सप्लाई ऑर्डर नं. 600 उन्होंने भी रिसीव किया, जिसकी पेमेंट दो लाख 36 हजार 776 रुपए थी, जिसमें उन्होंने पाया कि सप्लाई किया जाने वाला सामान सबस्टैंडर्ड है।
इस पर डढवाल ने ठेकेदार कालिया पर 4727 रुपए की रिकवरी डाली। इस पर कालिया ने उन्हें धमकाया और केबी शर्मा के सामने पेशी भी लगवाई। डढवाल ने कहा कि केबी शर्मा की ओर से भी उन्हें कई बार धमकी मिली, जिसकी शिकायत 19 मार्च 2008 को उन्होंने होम सेक्रे टरी और चीफ विजिलेंस ऑफिसर कृष्ण मोहन से की। शिकायत की एक प्रति उन्होंने आईजी को भी भेजी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि केबी शर्मा समेत कुछ अन्य लोगों से उन्हें जान का खतरा है इसलिए उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।
डढवाल ने कहा कि केबी शर्मा ने नाराज होकर 5-6 बार उनकी ट्रांसफर की और उनके पास से काम भी वापस ले लिया। 1999 में डढवाल को केबी शर्मा के इशारों पर सस्पेंड भी कर दिया गया।
इस पर तत्कालीन प्रशासक की सलाहकार और चीफ विजिलेंस ऑफिसर विनीता राय ने मामले की जांच करते हुए उन्हें तीन दिन में ही रीइंस्टेट करते हुए नगर निगम के तत्कालीन कमिश्नर एमपी सिंह को यह भी कहा था कि अगर डढवाल के खिलाफ कोई आरोप बनता है, तो अगले 15 दिन में उनके खिलाफ आरोप तय किए जाएं लेकिन एमसी की ओर से दो साल तक उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए जा सके। आरोप तय न होने की सूरत में नगर निगम कमिश्नर ने डढवाल के सस्पेंशन के आदेश को लिखित तौर पर वापस ले लिया।
एडीशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज राज राहुल गर्ग ने मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल रखी है, जब दो अन्य गवाहों मल सिंह और एएस गुलाटी समेत डढवाल के बचे हुए बयान दर्ज किए जाएंगे।
जेल गए थे अधिकारी
1998 में सीबीआई, इनकम टैक्स और विजिलेंस ने केबी शर्मा और प्रशासन के तत्कालीन चीफ इंजीनियर केके जयरथ के निवास, दफ्तर समेत अन्य जगहों पर जॉइंट रेड की। रेड में शर्मा ब्रदर्स की नोट बुक पकड़ी गई और सुनील कालिया की डायरियां बरामद की गईं। इनमें कुछ अफसरों के नाम के आगे उन्हें दी गई कमीशन लिखी थी। इसी के आधार पर यूटी विजिलेंस डिपार्टमेंट ने अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
सीबीआई ने मामले से जुड़े बिचौलियों और अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया। उसके बाद अधिकारियों को जेल भी भेजा गया। जेल गए अधिकारियों में केबी शर्मा, एक्सईएन हर्ष कुमार और तत्कालीन एसडीओ गुरप्रीत सिंह शामिल थे। जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद इन अधिकारियों को पुन: कुर्सियों पर बैठा दिया गया।