मुंबई.
प्रबंधन में माहिर लोगों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए देश के तमाम डॉक्टर अब एमबीबीएस व स्पेशियलाइजेशन करने के बाद बिजनेस मैनेजमेंट की ओर रुख कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ उनके कैरियर का विस्तार होगा, बल्कि वे तगड़ी कमाई भी कर सकेंगे।
ऑर्थोपेडिक सर्जन विश्वकीर्ति शर्मा का कहना है, ‘बिजनेस की डिग्री मेरे कैरियर ग्राफ को नई बुलंदियां देगी और मेडिकल सिस्टम के प्रति मेरी समझ को विकसित करेगी।
कमाई का लालच : शर्मा की ही तरह राहुल शास्त्री ने भी 2005 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली थी। उन्होंने ठीक इसके बाद कैट की परीक्षा दी और सीधा आईआईएम-कलकत्ता की ओर रुख कर लिया। उनका कहना है कि एमबीबीएस के बाद एमबीए करने से न सिर्फ उनके कैरियर को विस्तार मिलेगा, बल्कि यह उनके पे-पैकेज में इजाफा करने में भी मददगार होगा।
आईआईएम में डॉक्टरों की भरमार: हैदराबाद के इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट से ग्रेजुएशन करने वाले 425 लोगों में इस समय 10 डॉक्टर हैं। इनमें से पांच मेडिकल डिग्री में पीजी हैं और उन्होंने करीब सात-आठ साल तक प्रैक्टिस भी की है। कई डॉक्टर आईएमएम में भी दाखिले ले रहे हैं। आईआईएम-अहमदाबाद में इस समय करीब छह डॉक्टर, आईआईएम-लखनऊ में तीन और आईआईएम-कलकत्ता में दो डॉक्टर अध्ययन कर रहे हैं।
दोगुना फायदा : डॉक्टरों में मैनेजमेंट के प्रति बढ़ते झुकाव की मुख्य वजह कैरियर के विकल्पों में आई बूम को माना जा रहा है। एमबीए करने के बाद डॉक्टर किसी हॉस्पिटल या फार्मास्यूटिकल कंपनी में नौकरी कर सकते हैं, या फिर किसी मल्टीनेशनल कंपनी में मेडिकल कंसलटेंट के रूप में मोटी रकम हासिल कर सकते हैं। दस साल तक प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर का मासिक वेतन 50 हजार के करीब होता है, वहीं डॉक्टरी के बाद मैनेजमेंट से ग्रेजुएशन करने वाला पहली नौकरी में ही इससे दोगुना वेतन पा सकता है।
बढ़त की उम्मीद : विशेषज्ञों का अनुमान है कि मेडिकल क्षेत्र में कापरेरेट की घुसपैठ के बाद इसकी वृद्धिदर सालाना 15 फीसदी के लगभग हो सकती है, जिससे 2010 तक इसके करीब 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही है।
* ‘एक डॉक्टर का काम सिर्फ मरीज को ठीक करना ही नहीं है, बल्कि मेडिकल सुविधाओं व अन्य मसलों का ठीक ढंग से संचालन करना भी है।’
- राजेन घाडियोक, निदेशक मेडिकल ऑपरेशन ग्रुप, फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड
* ‘करीब एक दशक पहले इंजीनियरिंग करने वाले कई लोग एमबीए से अपना भविष्य चमका चुके हैं और अब डॉक्टरों की बारी है।’
- वीके मेनन, निदेशक कैरियर एडवांस्ड सर्विसेज, आईएसबी