इंदौर.
बुधवार को शहर में रंगपंचमी का उत्साह रहेगा। पश्चिम क्षेत्र में उत्साह कुछ खास होगा। अलग-अलग स्थानों से गेर के साथ राधा-कृष्ण की फागयात्रा निकलेगी।
संगम कॉर्नर, कैलाश मार्ग, टोरी कॉर्नर, मल्हारगंज, छीपाबाखल से सुबह 10 बजे से गेर निकलना शुरू हो जाएगी। उत्साह के साथ युवाओं की टोली गेर में नाचती-गाती शामिल होगी, मिसाइलों से रंग बरसेगा, लोगों के साथ घर भी रंग जाएंगे। सभी गेर दोपहर 12 बजे राजबाड़ा पहुंचेंगी। राजबाड़ा पर हजारों लोग जमा होकर गेर का आनंद लेंगे। साथ ही शहर के हर क्षेत्र में लोग एक-दूसरे को रंग लगाएंगे। नृसिंह बाजार के बद्रीनारायण मंदिर से राधा-कृष्ण फागयात्रा निकलेगी।
..और जब बद्री दादा हाथी से फिसले
गेर में पुराने समय शानो-शौकत से दादा-पहलवानों को हाथी पर बैठाया जाता था। लोग रास्तेभर इतना पानी डालते थे कि वे कांप जाते थे। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन कहते हैं एक बार पहलवान बद्री दादा को हाथी पर बैठाया। लोगों ने उन पर इतना पानी डाला कि हाथी से फिसलकर गिर पड़े। फिर वे कभी हाथी पर नहीं बैठे।
नौकरी ही छोड़ आए
कैलाश मार्ग निवासी प्रेमस्वरूप खंडेलवाल कहते हैं पहले मैं मुंबई में नौकरी करता था। हर बार गेर में शामिल होने के लिए इंदौर जरूर आता था। रंगपंचमी पर जब मालिक से छुट्टी मांगी तो उन्होंने मना कर दिया। गेर में शामिल होने का जुनून इतना था कि छुट्टी नहीं मिली तो मैंने नौकरी ही छोड़ दी।
घर की सारी महिलाएं झूमने लगीं
गेर में भांग मिली ठंडाई बंटती थी। जिंसी निवासी मोहन पहाड़िया कहते हैं मैं और मेरे बड़े भाई राकेश ने घर की सभी महिलाओं को वह ठंडाई पिला दी। उन पर भांग का रंग ऐसा चढ़ा कि वे नशे में नाचने लगीं। घर में बनी सारी मिठाइयां भी उन्होंने खत्म कर दी।
..जब दूध लेने गए और रंगे हुए लौटे
बड़ा गणपति निवासी किशोर मालानी बताते हैं 16 साल पहले रंगपंचमी के समय मेरे बड़े साले घर आए हुए थे। उन्हें यहां की रंगपंचमी के माहौल की जानकारी नहीं थी। बड़े होने से हम उन्हें रंग लगाने में कतरा रहे थे पर चाहते थे कि उन्हें किसी तरह रंगा जाए। उस समय हर चौराहे के बाहर कढ़ाव रखे रहते थे इसलिए बहाने से उन्हें घर के बाहर दूध लेने भेजा जैसे ही वे चौराहे पर गए आसपास के लोगों ने उन्हें पकड़कर कढ़ाव में डुबो दिया।
नए कपड़े हुए रंगीन
12 साल पहले गुजरात से आए भावेश सोनी कहते हैं यहां मनने वाली रंगपंचमी और छुट्टी की जानकारी मुझे नहीं थी इसलिए सुबह-सुबह ही मैं नए कपड़े पहनकर ऑफिस के लिए निकला था कि आसपास के सारे बच्चों ने मुझे रंग से तरबतर कर दिया।
..और लोग भी धोखा खा गए
गेर में पहले लोग तरह-तरह के आकर्षक स्वांग रचकर आते थे। कैलाश मार्ग निवासी विजय वर्मा कहते हैं एक बार मेरा दोस्त राधा का वेश बनाकर शामिल हुआ। उसे देखकर कोई पहचान ही नहीं पा रहा था कि ये महिला है या पुरुष। कई लोग उसे छेड़ने लगे। पहले तो वह कुछ नहीं बोला लेकिन थोड़ी देर बाद उसने जब चिल्लाना शुरू किया तो लोगों को समझ आया कि वह पुरुष है।