भोपाल. राजधानी के राजा भोज विमानतल पर पदस्थ इंडियन एयर लाइंस (अब एयर इंडिया) के करीब आधा दर्जन अफसरों ने फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाई है। जांच में इनमें से दो के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं, बाकी की जांच जारी है। विजिलेंस ने इंडियन एयर लाइंस को दोनों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। पिछले साल नवंबर में एयर इंडिया की विजिलेंस टीम ने भोपाल आकर तमाम दस्तावेज बरामद किए थे। एक दिसंबर 2007 को दैनिक भास्कर ने प्रथम पेज पर इस पूरे मामले का खुलासा किया था। भास्कर द्वारा प्रकाशित बिंदुओं को भी विजिलेंस टीम ने आधार बनाया था।
उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि यह शिकायतें इतनी गंभीर थीं कि इन पर कार्रवाई करने के लिए विजिलेंस टीम को छह महीने तक का इंतजार करना पड़ा। विभाग के अधिकारी नहीं चाहते थे कि यह जांच आगे बढ़े। एक पूर्व हाकी खिलाड़ी ने इसमें सबसे अधिक अड़ंगे लगाए। प्राप्त जानकारी के अनुसार विजिलेंस टीम ने जांच रिपोर्ट में एयरपोर्ट पर तैनात स्टेशन मैनेजर फीरोज खान द्वारा प्रमोशन के लिए लगाए गए हाकी टूर्नामेंट के प्रमाणों को गलत पाया है। उन्होंने कलकत्ता, हैदराबाद, कटक, मुंबई में हुए राष्ट्रीय टूर्नामेंट में इंडियन एयर लाइंस की टीम से खेलने के प्रमाण पत्र लगाए थे।। 1983 में मुंबई में हुए टूर्नामेंट में श्री खान का नाम टीम में नहीं था।
एक अन्य मैनेजर जफरुद्दीन की दसवीं की मार्कशीट गलत पाई गई है। उनके अन्य दस्तावेज भी फर्जी पाए गए हैं। विजिलेंस ने इन दोनों पर कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। एयर इंडिया के जनरल मैनेजर विजिलेंस एनके मारवाह ने नई दिल्ली से दैनिक भास्कर को फोन पर बताया कि इस मामले की जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। यह रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए नार्थ डिवीजन के कार्यपालक निदेशक डीएस कोहली को भेजी गई है।
ध्यान रहे कि इस पूरे मामले की शिकायत राजधानी के एक वकील राजकुमार पांडे ने की थी। उन्होंने जिस स्कूल की दसवीं की मार्कशीट लगाई थी, उसमें उस वर्ष दसवीं कक्षा थी ही नहीं।