भोपाल. बरकतउल्ला विवि अगले सत्र से सेमेस्टर प्रणाली लागू कर रही है, जिसमें होने वाले खर्चो को पूरा करने के लिए परीक्षा फीस में बढ़ोतरी की गई है। वहीं प्रीपीजी परीक्षा के नियमों में परिवर्तन किए जाने से डाक्टरों में असंतोष है। बीयू में एमए के पर्चे के पूर्णाक में गलती पाई गई, इसमें अंकों का कुल योग 90 ही था।
>> चुकाना होगी प्रोसेसिंग फीस
विश्वविद्यालय ने अगले सत्र से स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर प्रणाली लागू करने की पूरी तैयारी कर ली है। इस प्रणाली की परीक्षाओं में छात्रों का रिकार्ड सभी सेमेस्टर के लिए तैयार करने ओएमआर शीट पर परीक्षा आवेदन भरवाए जाएंगे। इसके लागू होने पर साल में दो बार परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी। बरकतउल्ला विवि द्वारा हाल ही में की गई परीक्षा फीस में बढ़ोतरी सेमेस्टर प्रणाली की वजह से की गई है।
अगले सत्र से शुरू की जाने वाली सेमेस्टर प्रणाली की परीक्षाओं के लिए विशेष प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी, जिसके खर्च के रूप में छात्रों से प्रोसेसिंग फीस ली जा रही है। कुलसचिव ने फीस वृद्घि के लिए छात्रों के मन में उठ रहे सवालों के जवाब में बताया कि इस तैयारी के लिए प्रोसेसिंग फीस ली जा रही है। अभी तक बीएड की परीक्षा में यह प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसके लिए प्रोससिंग फीस ली जाती है। बरकतउल्ला विवि द्वारा तैयार किया गया फीस ढांचा किसी भी अन्य विवि की सेमेस्टर प्रणाली में ली जा रही फीस से कम है। आरजीपीवी में भी परीक्षा फीस 1200 रुपए और 300 रुपए प्रति विषय के हिसाब से ली जा रही है।
>> प्रीपीजी नियम बदले जाने का विरोध
प्रदेश में प्री पोस्ट ग्रेज्यूएशन (प्रीपीजी) परीक्षा के नियमों में अचानक बदलाव किए जाने से डाक्टरों में अंतोष है और वे इनके विरोध में मुख्यमंत्री की शरण लेंगे। इस मामले को लेकर उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी भी कर ली है।
>> नए नियम
चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष प्रीपीजी के नियमों में बदलाव कर दिया गया। इनके तहत अब एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा के अंक प्रीपीजी परीक्षा परिणाम में शामिल करके मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। साथ ही कालेजों में नौकरी में रहते हुए डिमास्ट्रेटर प्रीपीजी परीक्षा में नहीं बैठ पाएंगे। डिमास्ट्रेटर को इन सर्विस केंडीडेट नहीं माना गया है, इनके लिए आरक्षित करीब बीस प्रतिशत सीटें भी सामान्य कोटे में शामिल कर दी गई है।
>> नहीं दी जानकारी
डाक्टर सुरेश सिंह का कहना है कि उक्त नियमों की घोषणा करने से पूर्व प्रीपीजी के उम्मीदवार एमबीबीएस डाक्टरों को इनकी कोई जानकारी ही नहीं दी गई। डाक्टरों ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक डा. वीके सैनी को इन नियमों के विरोध में ज्ञापन भी सौंपा, परंतु उन्होंने नियमों में संशोधन किए जाने से इंकार कर दिया। डा. आशुतोष सक्सेना ने बताया कि डाक्टर मुख्यमंत्री से इस मामले में चर्चा करने के लिए समय लेने का प्रयास कर रहे है। डाक्टरों को उम्मीद है कि वे नए नियमों को लागू नहीं होने देने के लिए अवश्य निर्देश देंगे। यदि सीएम ने उनकी मांगें पूरी नहीं की तो जबलपुर हाईकोर्ट में शीघ्र नए नियमों के विरोध में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
>> बीयू के पर्चे में गलतियां, छात्र परेशान
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बनाने वाले शिक्षकों की लापरवाही हर दिन किसी न किसी गलती के रूप में सामने आ रही है। मंगलवार को एमए के दो पचरें में अनुवाद और पूर्र्णाक में गलती पाई गई। परेशान छात्रों ने इसकी सूचना कुलसचिव को दे दी है। एमए मनोविज्ञान के प्रश्नपत्र में मंगलवार को 90 अंकों के प्रश्न ही पूछे गए, जबकि यह पर्चा 100 अंकों का होना था।
इसी तरह एमए फाइन आर्ट के पर्चे में एक प्रश्न के हिंदी अनुवाद में प्रश्न ही बदल दिया गया। इस प्रश्न के अंग्रेजी अनुवाद में जहां प्रदेश के चार चुनिंदा कलाकारों के नाम पूछे गए हैं, वहीं इसके हिंदी अनुवाद में देश के चार चुनिंदा कलाकारों के नाम पूछे गए हैं। परीक्षार्थी असमंजस में आ गए कि उन्हें देश के कलाकारों के नाम देना है या प्रदेश के कलाकारों के।
>> सफाई: उधर विवि प्रशासन इस बारे में सफाई दे रहा है कि गोपनीयता बरतने के लिए प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उनकी जांच करने का प्रावधान नहीं है। इसलिए प्रशासन पूरी तरह पेपर बनाने वाले पर ही निर्भर होता है। कुलसचिव संजय तिवारी ने इस लापरवाही की जिम्मेदारी तय कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।