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पंच-प्रधानों के आधे पदों पर महिलाएं, बिल पास

जयपुर. पंचायतीराज संस्थाओं में पंच, प्रधान और प्रमुखों के लगभग आधे पदों पर महिलाएं ही नजर आएंगी। राज्य विधानसभा ने मंगलवार को राजस्थान पंचायतीराज (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2008 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री कालूलाल गुर्जर की ओर से रखे गए इस विधेयक में कहा गया है कि पंचायतीराज संस्थाओं में अभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व एक तिहाई है जबकि जनसंख्या के अनुपात में महिलाओं की संख्या आधी है। इन संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 15 और 16 में संशोधन करना आवश्यक हो गया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस साल के बजट में महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में 50 फीसदी आरक्षण करने की घोषणा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में शहरी निकायों में भी महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू करने की घोषणा की थी।

बिना बहस पारित हो गया विधेयक :

पंचायतीराज संशोधन विधेयक मंगलवार को विधानसभा में बिना बहस के ही पारित हो गया। जिस समय पंचायतीराज मंत्री कालूलाल गुर्जर ने यह विधेयक सदन के विचारार्थ रखा, उस समय विपक्ष जिला प्रभारियों के मुद्दे को लेकर विरोध व्यक्त कर रहा था। आसन से बहस में भाग लेने वालों के नाम भी पुकारे गए, लेकिन किसी के नहीं बोलने और भाजपा के मदन राठौड़ द्वारा संशोधन वापस लिए जाने से विधेयक शोर-शराबे के बीच पारित हो गया।

यह किया गया संशोधन :

राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम की धारा 15 की उपधारा 5 और 6 में यह संशोधन किया गया है कि अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित स्थानों में एक तिहाई की जगह ‘आधे’ पद पढ़ा जाएगा। राजस्थान पंचायतीराज अधिनियम की धारा 16 की उपधारा 5 में भी अध्यक्षों के पदों पर भी कुल संख्या के एक तिहाई के स्थान पर ‘आधे’ पद पढ़ा जाएगा।





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