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बहता पैसा रोकिए, वेतन बढ़ाइए

जयपुर. payराज्य सरकार अगर छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करती है तो इसके लिए उसे ज्यादा चिंता में पड़ने की जरूरत नहीं है। यह काम वह आसानी से कर सकती है। सरकारी तंत्र में विभिन्न पदों पर काम कर चुके रिटायर्ड अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार के लिए 2500 करोड़ की राशि आटे में नमक के बराबर है और इसकी व्यवस्था करने में थोड़ी-बहुत सूझबूझ की जरूरत है।

‘भास्कर’ ने मंगलवार को वित्त सचिव, पुलिस प्रमुख, वित्त आयोग में सचिव जैसे पदों पर रह चुके प्रमुख लोगों का एक टॉक शो आयोजित किया तो कई रोचक सुझाव सामने आए। इन लोगों ने न केवल आपस में संवाद किया, बल्कि सवालों के जवाब भी दिए और कहा छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए इच्छा शक्ति की जरूरत है। बैठक में कर्मचारी नेताओं ने भी अपने सुझाव रखे।

कहां से आएगा पैसा?

जरूरत है -- 2500 करोड़ रुपए की

सरकार की व्यवस्था क्या है?

सरकार ने 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के हिसाब से बजट में व्यवस्था कर रखी है। बाकी के 20 प्रतिशत यानी 1250 करोड़ रुपए की ही उसे व्यवस्था करनी है।

पद खाली रखें, बचाएं हजार करोड़

सरकारी कर्मचारियों के 82 हजार पद खाली पड़े हैं। इन पदों का औसत खर्च सवा लाख रुपए से डेढ़ लाख रुपए प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष बैठेगा। सुझाव है कि अगर इन पदों को खत्म कर दिया जाए तो सरकार को 980 करोड़ रुपए से 1250 करोड़ रुपए की बचत होगी।

कर राजस्व से आएंगे 3000 करोड़

सरकार का टेक्स रेवेन्यू अभी 22000 करोड़ रुपए है, जो अगले साल बढ़कर 25000 करोड़ रुपए होने जा रहा है। इस तरह सरकार को वाषिर्क तौर पर 3000 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे। इससे छठे वेतन आयोग की इस राशि की भरपाई हो सकती है।

अफसरों के पद कम हों

राजनीति पर जिन वर्र्गो का प्रभाव ज्यादा है, उन्हें खुश रखने के लिए वेतन-वृद्धियों और कर्ज-माफियों का दबाव बहुत बढ़ गया है। पैसा बचाने के लिए अफसरों के पदों को 50 प्रतिशत कम किया जा सकता है। जितनी तरह के सचिव हमारे यहां हैं, उसकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलती। निचले स्तर पर कर्मचारियों के भी कई सोपान हैं। इससे सेवा में विलंब होता है और खर्च बढ़ता है।

जवाबदेही तय हो :

राज्य में उच्च शिक्षा के हालात इतने खराब हैं कि कॉलेजों में पूरे साल के दौरान सिर्फ 37 दिन ही पढ़ाई होती है। सुदूर स्कूलों में एवजी शिक्षक लगे हुए हैं। सरकारी अधिकारी ऐसी शिकायतों को अनसुना करते रहते हैं। वेतन बढ़े, लेकिन पगार के साथ जवाबदेही भी तय हो। फिजूलखर्ची पर रोक लगे।
-मंगलबिहारी, रिटायर्ड वित्त सचिव

अंधा खर्च रोकना होगा

राज्य सरकार को चाहिए कि वह सरकारी खर्च पर काबू पाने के लिए आला अफसरों के पदों को कम करे और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा पुलिस में निचले स्तर पर खाली पड़े पदों को हर हाल में भरे। इसके बिना सेवाओं का स्तर नहीं सुधारा जा सकता।

संसाधनों को देखें तो सरकार अपने बूते पर 25 से 28 प्रतिशत राशि का बंदोबस्त आसानी से कर सकेगी और बाकी व्यवस्था उसे अन्य स्रोतों से करनी होगी। लेकिन कई विभागों में कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन पर तो 85 प्रतिशत पैसा खर्च हो रहा है और विभाग आम लोगों पर 15 प्रतिशत ही राशि खर्च करता है। इन विसंगतियों को ठीक करने की जिम्मेदारी भी सरकार पर है।
-रामावतार रघुवंशी, सचिव, राजस्थान वित्त आयोग

पैसे का लीकेज रोकना होगा

हर महकमे में पैसे का लीकेज इतना ज्यादा है कि इसे रोक कर ही छठे वित्त आयोग के लायक पैसा बचाया जा सकता है। अफसरों और मंत्रियों की एकाउंटेब्लिटी तय होनी चाहिए। सरकार में अफसरों की तादाद और उन पर किए जा रहे खर्चे में कमी करके काफी पैसा बचा सकती है, लेकिन ऊपर भीड़ बढ़ती जा रही है और नीचे कर्मचारियों की तादाद कम होने से पांव कमजोर हो रहे हैं। फिजूलखर्ची की कोई सीमा नहीं है। छुट्टियां इतनी ज्यादा हैं कि समय की कोई कीमत ही नहीं है।
-सुभाष जैन, पूर्व चीफ इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी

बैलेट बॉक्सों के मैनेजमेंट का खेल

छठे वेतन आयोग की सिफारिशें बैलेट बॉक्सों के मैनेजमेंट की खातिर लागू की जा रही हैं। हमने पुलिस में पांचवां वेतन आयोग लागू किया था तो विभागीय बचत से ही यह काम हो गया था। मौजूदा सिफारिशें प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिशों के साथ लागू हों तो इनका कोई सकारात्मक असर रहेगा। सिफारिशों को लागू करने के बावजूद सरकार को चाहिए कि वह पुलिस में खाली पदों पर तत्काल भर्ती करे। हैरानी है कि पूरा सरिस्का उजड़ गया, सारे बाघ मारे गए, लेकिन सरकार ने वनप्रहरियों की भर्ती नहीं की।
-अमिताभ गुप्ता, पूर्व महानिदेशक, पुलिस

वित्तीय अनियमितताएं रोकनी होंगी

राज्य सरकार निर्माण कार्यो में वित्तीय अनियमितताओं आदि पर रोक लगाकर इतना पैसा बचा सकती है, जिससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकता है।
-विजय गोयल, बजट विश्लेषक

इनिशिएटिव लेना होगा

सरकारी तंत्र प्राइवेट सिस्टम की तरह काम करे तो ही बचत हो सकती है। कर्मचारियों को पुरस्कृत कर नई संस्कृति विकसित की जा सकती है।
-एम.एल.शर्मा, रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर, शिक्षा

बचत अभियान चलाया जाए

अगर ऊपर से नीचे तक हर स्तर पर बचत की मुहिम शुरू की जाए तो ही बड़ी राशि बचाई जा सकती है। इसके लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पहल होनी चाहिए।
-बीएम शर्मा, रिटायर्ड अधिकारी, खान विभाग





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