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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior करैरा. करैरा क्षेत्र में बिजली और पानी की कमी से त्राहि-त्राहि मची हुई है। अघोषित बिजली की कटौती और घटते जल स्तर ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। बेकाबू होती इन दोनों ही समस्याओं को लेकर अब नागरिक आंदोलन का मन बना चुके हैं।
हालात यहां तक बिगड़ चुके हैं कि कस्बे में दस दिन बाद नल आते हैं और वे भी दस मिनट के लिए। इस लिहाज से करैरा कस्बे में पूरे माह सिर्फ तीन दिन ही जल सप्लाई हो रही है। इन हालातों में नागरिक कैसे पेयजल की पूर्ति करते होंगे, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
खास बात यह है कि एक करोड़ से अधिक खर्च होने के बाद भी करैरा में पेयजल की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। एक करोड़ से अधिक लागत की जल आवर्धन योजना दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है और करैरा की जीवनदायिनी यह योजना अधर में लटकी हुई है।
इस योजना के अब तक शुरू न होने के लिए पीडब्ल्यूडी को जिम्मदार ठहराया जा रहा है। बताया जाता है कि पीडब्ल्यूडी द्वारा योजना में काफी गड़बड़ियां की गई है, जो कि जांच की जद में आती हैं। जल आवर्धन योजना के तहत खुदाई पूरी होने के साथ ही कुछ दूरी के पाइप भी डाले जा चुके हैं, लेकिन इसके बाद का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है।
हालांकि नगर पंचायत द्वारा भरसक कोशिश की जा रही है कि लोगों तक हर हाल में पानी में पहुंचाया जाए, लेकिन उसके इन प्रयासों में बिजली संकट बाधा बना हुआ है। बिजली की हालत यह है कि 24 में से बमुश्किल छह घंटे बिजली मिल पा रही है। सीमा लांघ चुकी पेयजल समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन प्रतिदिन साढ़े पांच हजार रुपए पानी के टैंकरों पर खर्च कर फिल्टर प्लांट के टैंक में पानी डलवाने की योजना बना रहा है।
इधर कस्बे में गहराए पेयजल संकट के लिए कांग्रेस नेता भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैंै , वहीं नगर पंचायत अपनी लाचारी जताती है। करैरा के पूर्व कांग्रेस विधायक किरनसिह रावत कहते हैं कि भाजपा सरकार की लापरवाही और झूठे आश्वासन के कारण करैरा के लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं और अब आंदोलन की बारी है।
इनके विपरीत नगर पंचायत अध्यक्ष कोमल साहू का कहना है कि क्षेत्र सूखे की चपेट में है और जल स्तर दिनों दिन घटता जा रहा है, इसके बाद भी पेयजल की उपलब्धता बरकरार रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।