वाशिंगटन. एक नये अध्ययन के अनुसार सीवर में काम करने वाले श्रमिंकों की मौत के लिए जिम्मेदार ‘हाइड्रोजन सल्फाइड’ गैस अल्प मात्रा में जीवन रक्षक भी साबित हो सकती है।
चूहों पर किये गए एक अध्ययन में पता चला कि इस गैस के प्रभाव से शरीर के तापमान और मेटाबोलिक दर में कमी आती है। गहरी चोट के कारण जब आक्सीजन की आपूर्ति सीमित हो जाती है तब यह बचने की संभावना को बढ़ाता है।
नए अध्ययन का उद्देश्य इन बातों के साथ-साथ यह पता लगाना भी था कि हाइड्रोजन सल्फाइड के सांस के साथ भीतर जाने पर हृदयवाहिनी तंत्र पर क्या प्रभाव हो सकते हैं।
अनुसंधानकर्ताओं ने सामान्य चूहों को कुछ घंटे तक कम मात्रा में हाइड्रोजन सल्फाइड देने के बाद उनकी हृदय गति, रक्तचाप और उनके शारीरिक तापमान की जांच की। कुछ चूहों को सामान्य तापमान पर और कुछ को उच्च तापमान वाली जगहों पर रखा गया।
पाया गया कि सभी चूहों में गैस सूंघने के दस मिनट के भीतर ही आक्सीजन ग्रहण करने तथा कॉर्बन डाईआक्साईड बाहर निकालने की प्रक्रिया धीमी हो गई और उनकी हृदय गति 50 फीसदी तक गिर गई। सामान्य वातावरण में वापस लाए जाने के आधे घंटे के भीतर ही उनकी श्वसन प्रक्रिया सामान्य हो गई।
इस अध्ययन के निष्कर्ष ‘एनेस्थेसियोलाजी’ के अप्रैल अंक में प्रकाशित किये गए हैं।