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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. कोआपरेटिव सोसायटी के एडिशनल रजिस्ट्रार ने मंगलवार को जिला को आपरेटिव बैंक के संचालक मंडल के 11 अप्रैल को होने वाले चुनाव को स्थगित कर दिया है। यह निर्णय मतदाता सूची में व्यापक त्रुटियों के आधार पर लिया गया। एडिशनल रजिस्ट्रार के फैसले से हताश भाजपाई राहत की सांस ले रहे हैं। वहीं कांग्रेसी शिविर में बेचैनी का आलम है।
एडिशनल रजिस्ट्रार ने कहा है कि मतदाता सूची को लेकर मिली शिकायतों को प्रारंभिक तौर पर देखने से यह पाया गया है कि सूची की व्यापक जांच की आवश्यकता है। इसके अभाव में सही रूप से चुनाव नहीं हो सकेगा और ऐसी स्थिति में स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना नहीं हो पाएगी। उन्होंने इस संबंध में चुनाव अधिकारी डिप्टी कलेक्टर टीआर पठारे को पत्र लिखा है।
गौरतलब है कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संचालक मंडल के चुनाव के मद्देनजर 7 मार्च को प्रथम मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया और 11 मार्च तक दावा-आपत्तियां मंगाई गई। प्रथम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद खलबली मच गई। हुआ यह कि कई अन्य भाजपा समर्थित समितियों के साथ ही जिला सहकारी केद्रीय बैंक के वर्तमान मनोनीत अध्यक्ष ज्योतिष कश्यप की समिति को डिफाल्टर घोषित कर दिया गया, इससे सहकारिता चुनाव में जीत के लिए फिल्डिंग कर रहे कांगे्िरसयों का पलड़ा भारी हो गया।
भाजपा समर्थित समितियां डिफाल्टर हो गइर्ं, कांग्रेस की समितियां पात्र घोषित कर दी गई। इसके बाद 298 प्राथमिक सहकारी समितियों सहित अन्य समितियों के डिफाल्टर व रेगुलर होने को लेकर भाजपा व कांग्रेस के मध्य आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। वर्तमान बैंक अध्यक्ष श्री कश्यप ने खुले तौर पर कांग्रेस पर निर्वाचन अधिकारी व अन्य अधिकारियों को अपने फेवर में कर मतदाता सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया।
कलेक्टर सुबोध सिंह से लेकर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह तक इसकी शिकायत की गई और अपनी कुर्सी खिसकती देखकर कई दिनों तक वे राजधानी के चक्कर लगाने विवश हो गए। 18 मार्च को 25 संचालकों के आरक्षण को लेकर हुई लंबी बैठक में मतदाता सूची में निर्वाचन अधिकारी को सूची में गड़बड़ी होने की पुन: शिकायत करते हुए श्री कश्यप ने संचालक मंडल के साथ मिलकर बैठक का बहिष्कार कर दिया।
इसके बाद भी निर्वाचन अधिकारी ने आरक्षण की स्थिति स्पष्ट कर दी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सहकारिता चुनाव स्थगित कराने श्री कश्यप ने अपना प्रयास नहीं छोड़ा लेकिन होली की छुट्टी पड़ जाने के कारण इसमें कुछ देर हो गई। त्योहार के बाद एक बार फिर प्रयास तेज किए गए और मंगलवार को इसमें सफलता मिल गई।
इधर चुनाव स्थगित होने के बाद सियासी परिदृश्य बदल गया है। कल तक जिन भाजपाईयों के चेहरों पर हवाईयां उड़ रही थीं, उनके चेहरों पर अब राहत व आशा की किरण दिखाई देने लगी है, वहीं चुनाव जीतने के लिए अंदर ही अंदर तैयारी करने के बाद निश्चिंत हो चुके कांग्रेसी बेचैनी का अनुभव करने लगे हैं।
सत्तासीन भाजपा द्वारा शुरू की गई चावल की राजनीति पर सेंध लगाने के लिए सहकारिता चुनाव में फतह का सपना देखने वाले कांग्रेसी अब छटपटाने लगे हैं। अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे क्या करें? वहीं भाजपाई मौके का फायदा उठाकर चुनाव में अपना पलड़ा भारी करने की कोशिश में नए सिरे से जुट गए हैं। बैठकों का दौर शुरू भी हो गया है।
निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव के लिए निर्णय: कश्यप
बैंक अध्यक्ष श्री कश्यप ने कहा है कि सहकारिता चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शितापूर्ण हो सके, इसलिए शासन ने इसे स्थगित किया है। मतदाता सूची में गंभीर त्रुटियों की शिकायत पहले ही की जा चुकी थी, जबकि इसे गंभीरता से लेते हुए और शिकायतों को आधार बनाकर सही निर्णय लिया गया है। चुनाव स्थगित होने के बाद ये तय हो गया है कि शुरू से ही निर्वाचन कार्यक्रम में अनियमितता बरती गई थी।
हार से बचने के लिए किया गया षड्यंत्र: अग्रवाल
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के पूर्व संचालक व हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए अशोक अग्रवाल का कहना है कि सहकारिता चुनाव में भाजपाइयों को हार झेलनी पड़ सकती थी, इस अंदेशे में षड्यंत्रपूर्ण ढंग से चुनाव स्थगित करवा दिया गया।
केंद्र द्वारा किसानों का कर्ज माफ करने के बाद भाजपाई अपनी डिफाल्टर समितियों को रेगुलर कराने का सपना देख रहे थे, जो सहकारिता चुनाव में उन्हें टूटता दिखाई दिया। पहली ही मतदाता सूची में श्री ज्योतिष की समिति अपात्र घोषित कर दी गई थी, इसलिए उन्होंने आला नेताओं से मिलकर चुनाव स्थगित करा दिया।