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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. लोहे के दाम सुनकर उद्योगपति से लेकर आम आदमी तक, सब हैरान-परेशान हैं। एक साल पहले 2200 से 2400 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मिलने वाला सरिया इस समय 5000 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।
सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद स्टील की कीमतों में कमी नहीं आ रही बल्कि केन्द्रीय बजट के बाद ही लोहे की कीमतों में 600-800 रु. प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। लोहे के दामों में आई तेजी के बाद विभिन्न स्टील उत्पादों की बिक्री 30 फीसदी तक घट गई है।
मंडी गोबिंदगढ़ में रोज लोहे के भाव बढ़ रहे हैं। यहां के रोलर मिल मालिकों का कहना है कि कच्चे लोहे के दाम में आई तेजी के कारण वे अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने को मजबूर हैं। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया इन्गट के भावों को नियंत्रित करने में फेल रही है। टैक्स का भी कीमत बढ़ाने में अहम रोल है।
अक्टूबर-नवंबर में लोहे की कीमत 3600 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास थी, जो जनवरी-फरवरी में 4200 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच गई। बजट का ऐलान होते ही मार्च में लोहे के दाम फिर बढ़े और इस सप्ताह यह 5000 रुपए प्रति क्विंटल का आंकड़ा छू गए।
लोहे के उत्पाद बनाने वाले पंजाब के उद्योग इस तेजी के कारण संकट में हैं। पीएचडी चैम्बर ऑफ कामर्स की पंजाब कमेटी के चेयरमैन राजीव बाली ने पंजाब सरकार से मांग की है कि टैक्स में राहत देकर उद्योगों को बचाया जाए।
पंजाब में बिजली संकट ने भी लोहे के दाम बढ़ाने में योगदान दिया है। मंडी गोबिंदगढ़ में रोलर मिल्स और फर्निश यूनिट पर दो दिन का पॉवर कट लगता है। अन्य पांच दिन भी पूरी सप्लाई नहीं मिलती। इससे उत्पादन घट गया है।