जम्मू.
जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले तो कुछ कम हुए हैं, लेकिन अब दूसरी तरह के खतरे बढ़ गए हैं। इनमें सबसे खतरनाक हमला एड्स का है। एड्स कंट्रोल सोसायटी इसके लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार मानती है जिनमें मुख्य रूप से सेना के जवान शामिल हैं। इसका दोष बाहर से आए मजदूरों और ट्रक चालकों पर भी मढ़ा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर में अब तक एड्स के करीब 1210 मामले प्रकाश में आ चुके हैं। वर्ष 2006 में यहां 34 नए मामले सामने आए थे, जबकि पिछले साल (2007) यह आंकड़ा 211 था। इस साल के शुरू के तीन माह में ही 80 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 20 से 50 वर्ष तक की आयु के लोग शामिल हैं।
एड्स कंट्रोल सोसायटी के निदेशक डा. एमए वानी सेना के जवानों के साथ-साथ सेक्स वर्करों और समलैंगिकों को भी एड्स फैलाने का दोषी मानते हैं।
50 मौतें : एड्स के मामले में जम्मू संभाग सबसे आगे हैं। राज्य के 84 फीसदी मामले इसी संभाग से सामने आए हैं जबकि कश्मीर संभाग में महज 16 प्रतिशत मामले ही प्रकाश में आए हैं। राज्य में एड्स से होने वाली मौतों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पिछले साल करीब 50 लोग एड्स के कारण मौत के मुंह में समा गए थे।
स्कूलों में शिक्षा : राज्य में एड्स का प्रकोप कम करने की कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं। नवीं कक्षा में एड्स का एक नया पाठ शुरू किया गया है तो दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में भी एड्स की जानकारी शामिल की गई है।