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International International इस्लामाबाद.
पाकिस्तान में नई सरकार को सत्ता में आए अभी चंद घंटे ही बीते हैं और दोनों मुख्य भागीदारों- पीपीपी और पीएमएल (एन) में प्रमुख मंत्रालयों को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। दोनों दल विदेश मंत्रालय अपने पास रखना चाहते हैं, जबकि लोगों की बढ़ी हुई अपेक्षाओं के मद्देनजर कोई भी वित्त मंत्रालय लेने को तैयार नहीं है।
सीटों के अनुपात में मंत्रालय : गठबंधन के दलों के बीच पिछले दो सप्ताह में हुई कई बैठकों में सीटों के अनुपात में कैबिनेट में स्थान देने पर सहमति हो गई है, लेकिन विदेश, रक्षा और गृह जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के बंटवारे पर मतभेद है।
कुरैशी बनेंगे विदेश मंत्री!
पीपीपी के शाह मेहमूद कुरैशी विदेश मंत्री हो सकते हैं। नवाज शरीफ सरकार में वित्तमंत्री रहे इशाक दर को फिर से यही मंत्रालय सौंपा जा सकता है। बेनजीर भुट्टो के सुरक्षा सलाहकार रहे रहमान मलिक को गृह मंत्री बनाया जा सकता है। जमायत उलेमा-ए-इस्लाम प्रमुख मौलाना फजल उर रहमान कश्मीर संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष हो सकते हैं।
29 मार्च को विश्वास मत : पीपीपी ने नेशनल असेंबली सचिवालय में प्रस्ताव भेजकर 29 मार्च शनिवार को सदन का सत्र बुलाने की मांग की है ताकि नए प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी उसमें विश्वास मत हासिल कर सके। पीपीपी व पीएमएल (एन) के सूत्रों के मुताबिक उसी दिन मंत्रियों की पहली बैच शपथ लेगी।
कई तानाशाहों के सलाहकार रहे पीरजादा को हटाया
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के विवादास्पद संविधान संशोधनों में प्रमुख भूमिका निभाने वाले विधि विशेषज्ञ शरीफुद्दीन पीरजादा को सैन्य सत्ता के अन्य सलाहकारों व सहायकों के साथ हटा दिया गया है। अक्टूबर 1999 में मुशर्रफ द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से ही वे उनके प्रशासन का हिस्सा रहे थे।
84 वर्षीय पीरजादा अपने लंबे कैरियर में अयूब खान, आगा मोहम्मद, याह्या खान और जिया उल हक जैसे सैन्य तानाशाहों के भी सलाहकार रह चुके हैं।