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प्रियजनों की खातिर खुद बदल जाते हैं लोग

लीडरशिप मंत्र. अकसर यह कहा जाता है कि लोग परिवर्तन का विरोध और उसे नापसंद करते हैं। क्या यह सत्य है? जब मैं पांचवीं कक्षा में था तो मेरे साथ एक घटना घटी। मैं त्रिची का रहने वाला था और अपनी गर्मी की छुट्टियों के लिए बेंगलुरु गया था। छुट्टियों के बाद जब मैं घर वापस आया तो मेरे माता-पिता मुझे एक नए घर में ले गए, लेकिन यह जगह मुझे पसंद नहीं थी, क्योंकि पुरानी जगह पर मेरे बहुत से दोस्त थे। मैं खुद को बहुत अकेला महसूस करता। कोई मेरे साथ नहीं खेलता था। मेरे माता-पिता ने इसे महसूस किया और वे अपने ऑफिस से जल्दी आने लगे और मेरे साथ खेलते। उनका यह रूटीन तब तक रहा, जब तक इस जगह पर मुझे नए दोस्त नहीं मिल गए।

उन्होंने इस बात को सुनिश्चित किया कि मैं जल्दी ही सहज हो जाऊं और नए घर में अधिक मौज-मस्ती करने लगूं। जब पिछली बातों को याद करता हूं, तो सोलह साल पहले घटी यह घटना इस सचाई का आश्वासन देती है कि ‘लोग परिवर्तन से घृणा नहीं करते हैं’। यह लीडर पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार से अपने लोगों को ऐसी सुखद स्थिति में ले आए कि वे परिवर्तन से प्यार करने लगें।

हमेशा याद रखें- १-लोग कभी भी परिवर्तन से नफरत नहीं करते और यह लीडर पर निर्भर करता है कि वह इस प्रकार का वातावरण तैयार करे कि लोग पिछले जीवन को भूलकर नए जीवन का आनंद उठाने लगें। २- लोग अपने प्रियजनों की खातिर बदल जाते हैंैं, इस बात को याद रखें कि आप हमेशा ऐसे लोगों के संपर्क में रहते हैं जो तार्किक होने के साथ स्वाभिमानी भी होते हैं। ऐसे में उनके समक्ष इस बात का प्रदर्शन करें कि आप उनका भरपूर ख्याल रखते हैं। प्रबंधन में बदलाव लाना ही लीडरशिप है।

-लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।





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