इंदौर.
रंगपंचमी यानी अपनों से परायों तक को रंगने का अंतिम मौका। कोई पीछे हटने को तैयार नहीं था। रंग नहीं, गुलाल ही सही, सूखा तो नहीं छोड़ेंगे। पश्चिमी इंदौर में गेरों व फागयात्राओं के माध्यम से रंगों की मस्ती बिखरी तो बाकी शहर में छोटे-बड़े, निजी या सार्वजनिक आयोजन होते रहे।
कहीं ड्रम से मग्गे भर-भरकर उलीचे जा रहे थे तो कहीं टैंकर में लगी पांच हार्स पॉवर की मोटर से निकली मोटी धार सराबोर कर रही थी। हाथी, घोड़े, ऊंट, बग्घी और बैलगाड़ियों पर मस्तानों की सवारी निकल रही थी। मिसाइलों से गुलाल उड़ रहा था और छतों से रंगभरी प्लॉस्टिक की थैलियां बरस रही थीं। रंग के गुबारों ने धरती और आकाश की दूरी पाट दी। किसी ने कृष्ण का स्वांग रचा था तो कोई बन गया भूत। कुछ तो सिर पर टाट की पगड़ी और गले में कचरे की माला पहनकर मटक रहे थे।
पंचमी की मस्ती में रंगों ने ऐसा जादू जगाया कि हर शख्स रंग और सुरों की जुगलबंदी में डूब गया। मुख्य मार्ग से लेकर गली-मोहल्लों तक रंगों की फुहारें बरसी और घर-घर में स्नेह व अपनेपन की खुशबू महकी। मुख्यमंत्री भी रंगों की परंपरा के मेजबान बने और फागयात्रा में शामिल होकर खूब गुलाल उड़ाई।
बुधवार को जैसे-जैसे सूरज का सुनहरी पीला रंग खत्म हुआ शहर की फिजा फिर रंगीन हो गई। दिन चढ़ने के साथ ही रंगों के त्योहार का माहौल दिखाई देने लगा। गली-मोहल्लों, कॉलोनियों में सड़कों पर बच्चों-युवाओं ने हर किसी को रंगा। दोस्तों को रंगने का मजा कुछ और था जो रंग नहीं खेल रहा था या धुलेंडी पर बच गया उसे भी नहीं छोड़ा।
पश्चिमी इलाके में सुबह 9 बजे से ही माहौल बनने लगा था। मल्हारगंज और आसपास गेर की तैयारियां शुरू हो गई थीं। बैलगाड़ी पर रंगों से भरे ड्रम रखे जा रहे थे तो टैंकरों में रंग घोला जा रहा था। गेर में कहां खड़े होना है यह भी तय कर लिया था। सुबह 10.15 बजे से मल्हारगंज से टोरी कॉर्नर रंगपंचमी महोत्सव समिति की गेर सबसे पहले निकली। फिर मालवा क्लब, उसके पीछे छीपाबाखल से मॉरल क्लब की गेर निकली।
उधर, कैलाश मार्ग से संगम कॉर्नर की गेर भी शुरू हो गई थी। चारों गेर में शामिल युवा डीजे की धुन पर नाचते-गाते रंग बरसा रहे थे। मल्हारगंज से राजबाड़ा तक सड़क के दोनों ओर लगे मंचों से रंग बरसाकर स्वागत किया गया। एक के पीछे एक चार गेर और फागयात्रा राजबाड़ा पहुंची तब उत्साह भी परवान चढ़ा। फूट्र मार्केट से होती हुई गेर सराफा पहुंची तो माहौल और रंगीन हो गया। इतवारिया बाजार, लोहारपट्टी होते हुए गेर मल्हारगंज पहुंची।नृसिंह बाजार से शुरू हुई राधाकृष्ण फागयात्रा में टेसू के फूलों से बना रंग व अरारोट की गुलाल बरसाई गई। इसमें मुख्यमंत्री भी सपत्नीक शामिल हुए। शहर के अन्य कई क्षेत्रों से भी फागयात्रा और गेर निकली।
राजबाड़ा चार घंटे हुआ रंगबिरंगा, हजारों लोग पहुंचे
गेरों की शुरुआत तो मल्हारगंज क्षेत्र से हुई पर ज्यादा उत्साह राजबाड़ा पर देखा गया। पूरा जनता चौक चार घंटे से भी ज्यादा देर तक अलग-अलग रंगों में रंगता रहा। गेरों में चल रही मिसाइलों को यहीं दूर तक रंग-गुलाल उड़ाकर शक्ति प्रदर्शन का मौका मिला। आकाश तक उठते गुलाल के गुबार, रंग-बिरंगे चेहरे और मस्ती में झूमते-नाचते लोग.. दोपहर में तो इतनी भीड़ थी कि पांव रखने की जगह तक नहीं मिली। दुकानों के ओटलों, बालकनी और छत पर भी सैकड़ों लोग जमे थे।
राजबाड़ा पर सबसे पहले करीब 11 बजे टोरी कार्नर की गेर पहुंची। फिर मालवा क्लब, मॉरल क्लब, राधाकृष्ण फागयात्रा और संगम कॉर्नर की गेर पहुंची। फागयात्रा में शामिल प्रभु प्रेमी संघ के वाहन को चौक में ही रोककर पीछे से आई संगम कॉर्नर की गेर को रास्ता दिया गया। अंत में करीब 1.30 बजे रसिया कॉर्नर की फागयात्रा पहुंची।
जय-जय सियाराम से गूंज उठा आसमान : फागयात्रा के रथ पर सवार मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान राजबाड़ा पहुंचे तो लोगों का उत्साह बढ़ गया। रंगों से भरे आसमान में जय-जय सियाराम का उद्घोष गूंजने लगा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री की एक झलक देखने के लिए लोग जुटे रहे।
कोई नहीं बचा सूखा : राजबाड़ा की ही तरह खजूरी बाजार का माहौल भी देखने लायक था। बाजार के राजबाड़ा वाले छोर पर सड़क के दोनों ओर मंचों पर दर्जनों ड्रम रंग बरसाने के लिए रखे थे। जो भी वहां से गुजरा कहीं न कहीं से रंगों की बारिश हो ही गई। एक के पीछे एक गेरें वहां पहुंची तो उन पर खूब रंग बरसाया। गेरों की तैयारी भी कम नहीं थी। इस बीच फागयात्रा पहुंची तो रंगों की धार गुलाल के गुबार में बदल गई।
सुरक्षा व्यवस्था के कारण : टोरी कॉर्नर, मालवा और मॉरल क्लब की गेर गोराकुंड से निकल गई थीं तब पहुंची फागयात्रा। इसका आधा हिस्सा खजूरी बाजार पार कर गया तब संगम कॉर्नर की गेर आ गई। फागयात्रा के बचे हिस्से में महिलाओं की टोली और मुख्यमंत्री का रथ भी था। मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था के चलते गेर गोराकुंड पर ही रोक दी गई।
टोरी कॉर्नर: टैंकर से स्वचलित मिसाइलों ने बरसाए रंग टोरी कॉर्नर से निकली गेर में मिसाइलों की बौछरों से कोई नहीं बच सका। टोरी कॉर्नर रंग पंचमी महोत्सव समिति के संयोजक शेखर गिरी और दीपक जोशी के नेतृत्व में निकली गेर में दो टैंकरों पर स्वचलित मिसाइलें लोगों को रंगीन कर रही थीं। बोरिंग मशीन से तिरंगे रंग की गुलाल उड़ रही थी।
मालवा क्लब: बोरिंग मशीन से बरसा गुलाल हिंद मालवा क्लब की गेर यशवंतगंज गणोश मंदिर से शुरू हुई। अशोक चौहान चांदू के नेतृत्व में निकली गेर में डीजे की धुन पर युवाओं की टोली खूब झूमी। पानी की बौछारों के साथ बोरिंग मशीन से सूखा रंग बरसाया जा रहा था।
संगम कॉर्नर : घरों तक गई बौछारें संगम कार्नर (कैलाश मार्ग) से निकली गेर का रंग भी खूब जमा। संचालक कमलेश खंडेलवाल के नेतृत्व में निकली गेर जब मल्हारगंज पहुंची तो माहौल खासा उत्साहित हो गया। गेर में घोड़े-ऊंट पर युवक सवार थे और बैलगाड़ियों में ड्रम में भरकर युवक लोगों पर रंग बरसा रहे थे। पीछे डीजे पर हजारों युवक नाचते-गाते चल रहे थे। एक बोरिंग मशीन तिरंगे रंग का गुलाल उड़ाते चल रही थी तो दूसरी रंग बरसाते।
‘राजनीति करने आए थे या त्योहार मनाने’ : संगम कार्नर गेर के संयोजक कमलेश खेंलवाल ने मुख्यमंत्री की यात्रा के मद्देनजर प्रशासन के रवैये पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है प्रशासन द्वारा दिए गए समय पर 11 बजे गेर शुरू कर हम 12 बजे गौराकुंड पहुंचे जहां हमें आधा घंटे तक रोके रखा। सीएम के कार्यक्रम में फेरबदल हुआ तो फिर रवाना कर दिया। थोड़ी देर बाद फिर रोक दिया और फाग यात्रा को जाने दिया। मुख्यमंत्री त्योहार मनाने आए थे या राजनीति करने।
मॉरल क्लब की गेर में बड़ी संख्या में युवक डीजे की धुन पर मस्ती में झूम रहे थे। मिसाइलों से गुलाल उड़ाया जा रहा था। टैंकर से लोगों पर रंग की फुहारें छोड़ी जा रही थीं। हनुमान मंदिर चौक तिलक पथ से सेनापति फाग मार्च निकाला गया। संयोजक मनीष पोल के अनुसार मार्च में रथ पर भारत माता का चित्र रखा गया था।
झलकियां
राधाकृष्ण फागयात्रा के साथ सुरक्षा घेरे में चल रही दाढ़ी-मूंछ लगाई महिलाएं और उनका नृत्य सर्वाधिक आकर्षित कर रहा था।
अन्नपूर्णा मंदिर से निकली उपयात्रा का नेतृत्व भी महिलाओं ने किया और वे ही रथ खींचकर लाईं।
फागयात्रा और गेर में शामिल कई लोगों के पास रंग-गुलाल से भरे झोले भी थे।
नृसिंह बाजार चौराहे पर लखन दादा अमर रहे के बैनर के साथ ठंडाई का बड़ा स्टॉल लगा था। सैकड़ों लोगों ने भंग की ठंडाई समझकर खूब छानी।
जवाहर मार्ग पर कुछ बच्चे होली की मस्ती में एक लड़के को खटिया पर सुलाकर घुमा रहे थे। कोई थाली बजा रहा था तो कोई डिब्बा।
बालदा कालोनी में कुछ लड़कों ने रंग की जगह मिट्टी का ढेर लगाया और गुब्बारों में भरकर फेंकने लगे। इसकी सूचना लोगों ने छत्रीपुरा थाने को दी तो पुलिसकर्मी पल्ला झाड़ते हुए बोले हम क्या कर सकते हैं।
सुभाष चौक हनुमान मंदिर के पास मुकेश पंडित, राजा सोनी ने गेर के संचालकों का स्वागत नारियल और चार आने से किया। यह परंपरा तीस साल से चली आ रही है।
राजबाड़ा पर जो भी सूखा दिखाई दिया कुछ लोगों ने मिलकर रंग दिया।
संगम कॉर्नर की गेर में शामिल युवा एक व्यक्ति को सड़क से उठाकर बैलगाड़ी पर लाए और ड्रम भर पानी उस पर डाला।
गेर में एक युवक भूत के वेश में आया। उसके गले में नरमुंड लटका था और पगड़ी में बंधी पिचकारी से रंग उड़ा रहा था।
एक किशोर ने चेहरे को तिरंगे झंडे के रंगों में रंग लिया था। केसरिया रंग पर ओम लिखा था। यह युवक नाचते हुए आगे आकर अपनी ओर सबका ध्यान खींच रहा था।
नहीं बच सकीं राजबाड़ा पर
एक महिला गेर देखने परिवार के साथ राजबाड़ा पहुंची। पूरे रास्ते तो बच गई लेकिन राजबाड़ा पर ओटले पर खड़े होकर गेर देख रही थीं तब कुछ युवतियों ने पकड़ा और रंग दिया।