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ओबीसी से तौबा!

जयपुर.obcराजस्थान में ओबीसी कोटे ने सारा ताना-बाना डावांडोल कर दिया है। दरअसल, मात्र 21 प्रतिशत सीटों के लिए राज्य की आधी जनसंख्या को मौका दिया गया है, जिससे आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि ओबीसी की बजाय सामान्य वर्ग का कम कट ऑफ मार्क्‍स में सलेक्शन हो रहा है। इससे हालात ये हो गए हैं कि ओबीसी के छात्र अब सामान्य वर्ग से प्रतियोगी परीक्षा देना चाहते हैं।

ओबीसी छात्रों का मानना है कि सामान्य वर्ग में ५१ सीटों के लिए केवल ३४ प्रतिशत ही जनसंख्या होने से प्रतिस्पर्धा में कमी आ गई है, जबकि ओबीसी वर्ग में रहकर २१ प्रतिशत सीटों के लिए प्रदेश की आधी जनसंख्या से जूझना पड़ रहा है। विधि एवं जाति विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ओबीसी के छात्र अपना वर्ग छोड़कर सामान्य वर्ग से प्रतियोगी परीक्षा देंगे तो आरक्षण की व्यवस्था बिगड़ जाएगी।

माना जा रहा है कि इस बार आरएएस-प्री के रिजल्ट में सामान्य से अधिक ओबीसी के कट ऑफ मार्क्‍स आना भी आरक्षण की व्यवस्था बिगड़ने का संकेत है। आरएएस-प्री मे सामान्य वर्ग से अधिक कट ऑफ मॉर्क्‍स ओबीसी वर्ग के होने से इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि ओबीसी वर्ग का शैक्षणिक स्तर सामान्य वर्ग से बेहतर आ गया है।

>> पाला बदलेंगे ओबीसी छात्र :

आरएएस-प्री के रिजल्ट से 70 फीसदी ओबीसी वर्ग के छात्रों के दिमाग में यह बात घर कर गई है कि ओबीसी कोटे से फार्म भरना फायदे का सौदा नहीं होगा। राज्य लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जीएम खान का कहना है कि आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में ओबीसी वर्ग के छात्र निश्चित तौर पर सामान्य कोटे से ही परीक्षा देंगे। इससे आरक्षण की व्यवस्था पर फर्क पड़ेगा।

>> कहना है-

गुर्जर आंदोलन के पीछे भी यही

-गुर्जर आरक्षण आंदोलन का मुख्य कारण यह भी था कि गुर्जर समाज के लोगों को यह बात समझ में आ गई थी कि ओबीसी वर्ग की जनसंख्या आधी हो रही है, जबकि उनके लिए रिजर्व कोटा केवल 21 प्रतिशत का है। इसलिए गुर्जर समाज ने ओबीसी कोटे से निकलने के लिए आंदोलन किया। अगर आरक्षित वर्ग सामान्य कोटे में आकर प्रतियोगिता परीक्षा देता है तो कानूनन नहीं रोका जा सकता। इस स्थिति से निबटने के लिए कानून बनाने की जरूरत है।
जसराज चोपड़ा, सेवानिवृत्त न्यायाधीश

>> आजादी के बाद जब ओबीसी वर्ग के आरक्षण का निर्धारण हुआ था, तब स्थिति अलग थी और अब अलग है। हालात सबके सामने हैं।

सामान्य कोटे से देंगे परीक्षा

>> आरएएस प्री में मेरे कट ऑफ मार्क्‍स २00 थे, लेकिन ओबीसी के कट ऑफ मार्क्‍स २0६ रहने से मेरा सलेक्शन नहीं हुआ। अगर मैं सामान्य वर्ग से फार्म भरता तो मेरा आरएएस-प्री सलेक्शन हो जाता। मैंने तय किया है कि अगली बार आरएएस-प्री व अन्य परीक्षाएं सामान्य कोटे से दूंगा।
>> जितेंद्र सिंह, ओबीसी छात्र, भरतपुर
>> शशिकांत शर्मा, अध्यक्ष आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग

यह सच है कि ओबीसी वर्ग के छात्र सामान्य कोटे से परीक्षा देने की मंशा रखते हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो आरक्षण की व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।
डॉ. राघव प्रकाश, निदेशक, परिष्कार

अनसोचा सच

ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षण अब लाभ का विषय नहीं रह गया है। आरक्षण देते और लेते वक्त किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कभी ओबीसी के कट ऑफ मार्क्‍स सामान्य से ज्यादा भी जा सकते हैं। आज यह सच्चई बन चुकी है।

अनजाना भय

ओबीसी में आपसी प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि इस वर्ग के छात्रों को पिछड़ने का भय है। वे सामान्य वर्ग से प्रतियोगी परीक्षाएं देना चाहते हैं। आरएएस-प्री में कई छात्रों को ओबीसी वर्ग में होने का नुकसान उठाना पड़ा।

अनदेखा क्यों!

विधि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ओबीसी छात्र सामान्य वर्ग से परीक्षाओं में शामिल होने लगे, तो न केवल सामान्य वर्ग प्रभावित होगा, बल्कि आरक्षण व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा जाएगी। इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

ओबीसी का भविष्य खतरे में

ओबीसी में आधी जनसंख्या पर केवल २१ फीसदी सीटें आरक्षित होने से ओबीसी वर्ग के छात्रों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है। सामान्य कोटे की ५१ प्रश सीटों के लिए केवल ३४ प्रश जनसंख्या की प्रतिस्पर्धा को ओबीसी वर्ग के छात्र बेहतर मानने लगे हैं। जल्द ही रास्ता निकालना होगा।
-बीजी रावत, लॉ प्रोफेसर

ठोस कानून बनाने की जरूरत

आरक्षित वर्ग के लोग सामान्य वर्ग में दाखिल नहीं हो सकें, इसके लिए सरकार को ठोस कानून बनाने की जरूरत है। अगर सामान्य कोटे से ओबीसी वर्ग के छात्र प्रतियोगी परीक्षा देंगे तो सामान्य वर्ग बुरी तरह प्रभावित होगा और आरक्षण की व्यवस्था चरमरा जाएगी।
-पीके तिवाड़ी,अध्यक्ष, ओबीसी आयोग

सामान्य वर्ग से परीक्षा देने में लाभ

मैंने तय किया है कि अगली बार प्रतियोगी परीक्षा सामान्य वर्ग से देना उचित होगा। आरक्षण की व्यवस्था मे ओबीसी का २१ प्रतिशत कोटा है जबकि जनसंख्या आधे के करीब है। इसलिए सामान्य वर्ग की ३४ प्रतिशत जनसंख्या की प्रतिस्पर्धा में शामिल होना बेहतर होगा।
-धर्मेद्र सिंह,ओबीसी छात्र, जयपुर





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