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चौपहिया वाहनों में आटो डिपर लगाना जरूरी

भोपाल. प्रदेशभर के सरकारी वाहनों सहित सभी चार या अधिक पहियों वाले वाहनों की आंखें चौंधिया देने वाली रोशनी पर लगाम कसी जा रही है। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों में आटोमेटिक डिपर लगाने के निर्देश दिए हैं, जिससे रात के समय दो सौ मीटर की दूरी पर आमने-सामने आए दो वाहनों की लाइट स्वत: ही डिपर में बदल जाएगी।

परिवहन विभाग ने पिछले सप्ताह ही इस संबंध में राज्य के सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) को पत्र लिखकर निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें केंद्र के नियमों का हवाला देकर कहा गया है कि वाहनों में शीघ्र ही आटोमेटिक डिपर लगाए जाएं। हालांकि 500 सीसी से कम इंजन क्षमता वाले दो-तीन पहिया वाहनों को इस नियम से छूट दी गई है। आरटीओ दिनेश कुमार जैन कहते हैं कि मुख्यालय से इसके निर्देश प्राप्त हो गए हैं।

व्यावसायिक वाहन स्वामियों को इसका पालन कराने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वहीं, कार्यालय को निर्देश दिए जा चुके हैं कि व्यवस्था लागू होने के बाद बगैर आटो डिपर वाले वाहनों का न तो पंजीयन किया जाए और न ही उन्हें परमिट या फिटनेस और प्रमाण-पत्र दिए जाएं।

ट्रैफिक डीएसपी एसएस लल्ली का मानना है कि आटो डिपर लगने से रात में होने वाले हादसों में भारी कमी आएगी। इसे लागू करने के प्रयास पूर्व में भी किए जा चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली थी।।

कैसे काम करेगा डिपर: सामने से आने वाले वाहनों की रोशनी जैसे ही आपके विंड स्क्रीन पर टकराएगी, आपकी स्क्रीन पर लगे सेंसर आपकी हेड लाइट को डिप कर देंगे। सामने वाले वाहन के बाजू से गुजरते ही लाइट हाई बिंब पर हो जाएगी। यह प्रक्रिया एक सेकंड से भी कम समय में पूरी होगी।

आटो डिपर के फायदे

-डिपर न देने वाली मानवीय भूल की गुंजाइश शून्य होगी।

-बार-बार डिपर देने से निजात मिलेगी।

-ड्राइवर का तनाव कम होगा।

-अंधे और घुमावदार मोड़ पर सामने से रोशनी पड़ने पर भी लाइट होगी डिपर।

नहीं लगाएंगे तो..

-नहीं होगा आरटीओ में पंजीयन

-फिटनेस प्रमाण-पत्र नहीं मिलेगा

-व्यावसायिक वाहनों को नहीं मिलेगा परमिट





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