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अच्छे सुझाव भी डस्टबिन में

रायपुर. बस स्टैंड, रेलवे, नगर निगम, बैंक, कलेक्टोरेट, तहसील, अस्पताल, पुलिस विभाग, कोर्ट जैसे सरकारी संस्थाओं से हजारों लोगों का रोजाना लाइव संपर्क रहता है। इनमें से दर्जनों कुछ न कुछ समस्याओं के शिकार हो जाते हैं, जिन्हें सुलझाने वाला कोई नहीं है। तुरंत शिकायत के इंतजाम नहीं हैं क्योंकि ज्यादातर दफ्तर शिकायत पेटियों के भरोसे हैं। पेटियों की हालत देखकर अब शिकायत करनेवाले भी इससे घबराने लगे हैं।

रेलवे में सब बेकार

रेलवे अफसरों का दावा है कि लोग शिकायतें लेकर पहुंचते ही नही हैं। कंप्लेट बुक तथा अफसरों को हर महीने औसतन दर्जनभर शिकायतें मिलती हैं। लोगों का कहना है कि शिकायतों का समाधान नहीं होने की वजह से शिकायतें नहीं होती। सीनियर डीसीएम एसके सिंह का कहना है कि विभाग से होने वाली शिकायतों के लिए सभी रेलवे स्टेशनों पर कंप्लेट बुक रखी गई है। इसके अलावा एसी डिब्बों के टीसी के पास, रेलवे क्रासिंग आदि स्थानों पर लोग अपनी शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं। कंप्लेट बुक की जांच हर माह होती है। छोटी शिकायतों को एक माह के भीतर और बड़ी शिकायतों को जोन में फारवर्ड कर दिया जाता है।

बस स्टैंड में बदइंतजामी

राजधानी के न्यू बस स्टैंड में यात्री सुविधाओं का अभाव है। बस आपरेटर और नगर निगम एक दूसरे पर काम न करने का आरोप लगाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। मुसाफिरों को हजारों परेशानियां हैं, लेकिन सुने कौन। सुझाव पेटी ऐसी जगह पर कि ढूंढ़ते रह जाओगे। बस आपरेटर संघ के अध्यक्ष प्रमोद दुबे का कहना है कि निगम की ओर से व्यवस्था नहीं होने की वजह से यात्रियों की तकलीफें जस की तस है। उनके पास जो भी समस्याएं आती हैं वे उसका तत्काल निराकरण करने की कोशिश करते हैं।

कलेक्टोरेट में परेशानी

कलेक्टोरेट पहुंचे लोगों का कहना है कि यहां एक बार में कभी कोई काम नहीं होता है। कई बार सुझाव पेटी के अलावा अधिकारियों से शिकायतें की गई। बड़े अधिकारी हैं छोटे लोगों की सुनने तैयार नहीं। इसलिए न शिकायतें होती हैं, और न ही सुझाव दिए जाते। कलेक्टर विकासशील ने कहा कि शिकायतें दूर करने अलग से सेल का गठन किया गया है। इसके अलावा सुझाव पेटी भी है। लोगों को लगता है कि उनकी शिकायतों या सुझावों पर अमल नहीं हो रहा है तो वे प्रत्यक्ष संपर्क कर सकते हैं।

बैंकों का क्या करें

राजधानी के लगभग सभी बैंकों में सुझाव पेटियां लगाई गई हैं, लेकिन यह खुलती कब हैं किसी को भी नहीं पता। कुछ लोग इनमें सुझाव भी देते हैं,पर अभी तक किसी में अमल नहीं किया गया। दूसरी ओर बैंक अधिकारियों का दावा है कि लोगों के सुझावों पर अमल करने के साथ उनकी शिकायतों को दूर करने हर संभव प्रयास किए जाते हैं। स्टेट बैंक आफ इंडिया के जनसंपर्क अधिकारी प्रकाश देशमुख ने कहा कि ग्राहकों की शिकायतें दूर करने के लिए समय-समय पर ग्राहक मिलन समारोह आयोजन करवाया जाता है। लोगों के सुझाव बैंक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित करवाए जाते हैं।

मरीजों की कौन सुने

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल का हाल भी कुछ ठीक नहीं। मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों और सुझावों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल अधीक्षक डा. विवेक चौधरी का कहना है कि किसी को कोई समस्या है तो उनसे आकर मिले। छोटी-मोटी शिकायतें तो सभी को रहती हैं।

कभी जरुरत नहीं पड़ी

जिला अदालत में लोगों के सुझाव के लिए एक पेटी तक नहीं है। बार कौंिसल के पदाधिकारियों का कहना है कि इसकी कभी जरुरत ही नहीं पड़ी। लोगों ने भी इसके लिए डिमांड नहीं की। राजधानी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन सोनी ने कहा कि अधिवक्ताओं के सुझाव और शिकायतें डीजे के पास पहुंचा दी जाती है। लोगों को कोई परेशानी है तो वे बार कौसिंल के सदस्यों से मिलकर उन्हें बता सकते हैं।

निगम का हाल भी बुरा

निगम में लोगों के सुझाव और शिकायतों के लिए अलग सेल गठित किया गया है, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं है। लोगों का कहना है कि निगम उनकी शिकायतों पर तो ध्यान देता नहीं है तो सुझावों का क्या फायदा है। दूसरी ओर निगम कमिश्नर जितेंद्र शुक्ला का कहना है कि लोगों की शिकायतों और सुझावों पर गंभीरता से अमल किया जाता है।





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