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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. राज्य शासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए एक वर्षीय पैरामेडिकल पाठ्यक्रम को पाठ्यक्रम की अनुसूची में शामिल करने निर्देश दिए हैं। शासन के इस निर्णय से करीब दो हजार छात्र लाभान्वित होंगे और ग्रामीण अंचल में निजी प्रैक्टिस कर सकेंगे।
२ अक्टूबर, २00२ से प्रदेश में एक वर्षीय पैरामेडिकल प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम की शुरुआत की गई थी। दिसंबर २00५ तक राज्य के छह जिलों रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़ व अंबिकापुर में छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया । शासन ने पाठच्यक्रम अनुसूची में शामिल न होने के कारण एक वर्षीय पैरामेडिकल प्रमाण पत्र के पंजीयन पर रोक लगा दी, जिसके कारण १५-२0 हजार खर्च कर शासकीय योजना के तहत प्रशिक्षण लेने वाले छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा और वे बेरोजगार हो गए।
स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल की पहल पर राज्य शासन ने छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए एक वर्षीय पैरामेडिकल पाठच्यक्रम की अनुसूची में शामिल करने का निर्णय लिया। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशानुसार अब इन छात्र-छात्राओं का छत्तीसगढ़ सह चिकित्सकीय परिषद रायपुर कार्यालय में पंजीयन होगा। पंजीयन के बाद पैरामेडिकल का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद बैठेछात्र छात्राएं स्वतंत्र रूप से ग्रामीण क्षेत्र में प्रैक्टिस कर सकेंगे।
राज्य शासन के इस निर्णय से पैरामेडिकल विद्यार्थियों की तीन बरस पुरानी मांग पूरी हो गई। इस निर्णय से करीब दो हजार विद्यार्थी लाभांवित होंगे और ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा सेवा दे सकेंगे। इस निर्णय के के बाद पैरामेडिकल के विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।
छात्रों को स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वस्त किया है कि स्वास्थ्य विभाग में यदि पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भर्ती होती है, तो उन्हें इस भर्ती प्रक्रिया का लाभ दिया जाएगा वे आवेदन कर सकते हैं।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने प्रदेश के गांवों में डाक्टरों की कमी को देखते हुए एक पैरामेडिकल कोर्स की शुरुआत की थी, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को चिकित्सा सुलभ हो सके।