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दारू के दामों पर नहीं चलेगी मनमानी

बिलासपुर. मदिरा प्रेमियों के लिए यह खुशखबरी हो सकती है कि अब ठेकेदार उनसे मनमाने दाम नहीं वसूल सकेंगे। राज्य में शराब की बोतलों पर अधिकतम और न्यूनतम मूल्य अंकित किया जाएगा। ठेकेदारों को इसी के अनुसार शराब बेचनी होगी।

पूरे राज्य में शराब की एक-सी दर लागू करने और ठेकेदारों की मनमानी रोकने के लिए इस बार राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके तहत शराब की बोतल पर अधिकतम व न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दर्ज करने का निर्णय लिया है। एक अप्रैल से अंग्रेजी व देसी शराब दुकानों पर सजी बोतलों पर उनका दाम भी लिखा मिलेगा। ग्राहक बोतल पर लिखा दाम देखकर ही भुगतान करेंगे।

इससे शराब के मूल्य की असमानता खत्म होने के साथ ग्राहक के ठगे जाने की आशंका भी नहीं रह जाएगी। अब तक राज्य में अलग-अलग समूह के ठेकेदार अपनी मर्जी से मदिरा के दाम वसूलते थे। मूल्य जानने की कोई व्यवस्था न होने के कारण ग्राहक भी आमतौर पर दुकानदार से बहस करने की जगह चुपचाप दाम चुकता कर देते थे। जिले में 46 समूह में 131 शराब दुकानें आबकारी विभाग द्वारा संचालित की जाती हैं।

ये दुकानें शहर और ग्रामीण इलाकों दोनों जगहों पर चलती हैं। अभी हालत यह है कि शहर के अंदर ही एक ब्रांड की शराब अलग-अलग दामों पर मिलती है। शहर के बाहर मेन रोड या राजमार्गो पर तो स्थिति और भी अलग है। इन जगहों से आमतौर पर बाहर से आने वाले ट्रक-बस चालक या इसी तरह के अन्य लोग शराब लेते हैं। दुकानदार अपनी मर्जी के अनुसार उन्हें मूल्य बताते और लोग चुकता भी कर देते हैं। अब बोतल पर अधिकतम मूल्य और न्यूनतम मूल्य होने से वे उसे देखने के बाद ही भुगतान करेंगे।

शासन ने जारी किया आदेश

राज्य शासन द्वारा जारी किए गए आदेश में छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के नियम 17 में संशोधन करते हुए कहा गया है कि देसी व अंग्रेजी शराब की बोतलों पर लेबल में मूल्य अंकित रहेगा। लाइसेंस धारक उस अधिकतम मूल्य से ज्यादा में शराब नहीं बेच सकेगा। ऐसा करने की शिकायत मिलने पर उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। आबकारी विभाग ने आदेश मिलने के बाद इस संबंध में सभी डिस्टलरीज व ठेकेदारों को भी सूचित कर दिया है। शासन से रेट लिस्ट मिलने के बाद बोतलों के वजन, पैकिंग के अनुसार खुदरा मूल्य अंकित कर दिया जाएगा।

न्यूनतम मूल्य से कम भी नहीं ले सकेंगे

शासन ने सिर्फ ज्यादा दाम लेने पर ही रोक नहीं लगाई है, बल्कि न्यूनतम मूल्य भी अंकित कर उससे कम पर शराब बेचने को अवैध घोषित किया है। इससे स्पर्धा के कारण दाम कम करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। हालांकि दाम कम करने से ग्राहकों को कोई नुकसान न होने के कारण ऐसा कहीं छिपे तौर पर किया जाता है, तो इसका विरोध भी होने की संभावना नहीं है।





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