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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior रन्नौद. सूखे की साल में पानी के गहराने वाले संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने भले ही जिले में ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन इसके बाद भी रन्नौद और खतौरा क्षेत्र के गांवों में बेखौफ होकर बोर हो रहे हैं। इसके एवज में किसानों से मोटी रकम मशीन संचालक और दलालों द्वारा वसूल की जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि किसानों से बोरिंग के अलावा तीन-तीन हजार रुपए अनुमति के नाम पर लिए जा रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि जिस तादात में क्षेत्र में अब तक ट्यूबवेल लग चुके हैं, उनकी शासकीय स्तर पर अनुमति ही नहीं दी गई है। सूत्र बताते हैं कि रन्नौद और खतोरा के गांवों में रोक के बाद भी लगभग एक हजार ट्यूबवेलों का खनन हो चुका है।
इस क्षेत्र में एक-दो नहीं बल्कि पूरी सात बोरिंग मशीनें घूम रहीं हैं। यह मशीनें दलालों के माध्यम से बोरिंग कर रही हैं। बताया जाता है कि पानी की आस में सात-सात सौ फीट की गहराई तक बोर कराए जा रहे हैं। वे किसान खुशकिस्मत है, जिनके बोर में पानी निकल आता है लेकिन जिनके बोर सूखे निकल जाते हैं, वे अपने भाग्य को कोसते रह जाते हैं। ग्रामीणों की मानें तो अधिकांश बोर सूखे निकल रहे हैं और उनमें पानी की एक बूंद भी नहीं निकल रही है।
किसान कांग्रेस के ब्लाक अध्यक्ष गुरुप्रताप सिंह गिल ने कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव से रन्नौद और खतौरा क्षेत्र में होने वाले ट्यूबवेलों पर रोक लगाने की मांग की है, ताकि सूखे की साल में किसान लूटने से बच सकें।