सिडनी. अभिभावक अपने बच्चों के खान-पान को लेकर हमेश सतर्क रहते हैं। लेकिन अनजाने ही वह अपने बच्चे के टिफिन में बीमारी दे रहे हैं।
कुर्टिन विश्वविद्यालय के अनुसंधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि अभिभावक कई कारणो से बच्चों के टिफिन में फल-सब्जियां और अन्य लाभकारी खाद्य पदार्थ को शामिल नहीं कर पाते। इसके पीछे सामाजिक-आर्थिक पहलू भी हैं।
विश्वविद्यालय में आहार-पोषण विषय की प्रोफेसर और बच्चो के ‘आहार-पोषण’ पर शोध कर रही कैथरीन बाथगेट ने बताया, ‘‘मैंने लगभग 50 बच्चों के अभिभावक से पोषक आहार के बारे में बात की और सभी के पास लगभग एक जैसी ही समस्याएं थी कि बच्चों को टिफिन में क्या दें जो उन्हें स्वस्थ रखे।’’
उन्होंने बताया कि दो बच्चों की मां होने के कारण उन्हें भी दूसरे अभिभावको के साथ समानुभूति जैसा एहसास हो रहा है।
बाथगेट ने बताया कि अब अभिभावक बहुत समझदार हो गए हैं। उन्हें पता है कि बच्चों के लिए कौन-सा खाद्य पदार्थ अच्छा है और कौन-सा नहीं लेकिन आसानी से उपलब्ध होने के कारण वे सुपरमार्केट से पहले से पैक किया हुआ खाद्य पदार्थ खरीद लेते हैं।