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Personal Finance Personal Finance नई दिल्ली. दुनिया में सबसे सस्ती कॉल दरों का मजा ले रहे भारतीय उपभोक्ताओं को अब और भी सस्ती कॉल दरों का लाभ मिल सकता है। गांवों में बीएसएनएल की सेवाओं के लिए निजी कंपनियां जो शुल्क (एडीसी) चुकाती हैं, ट्राई ने उसे एक अप्रैल से खत्म करने का फैसला किया है। मोबाइल कंपनियों ने कहा है कि वे इसका लाभ उपभोक्ताओं को देंगे। जिससे मोबाइल कॉल दरें और सस्ती हो सकती हैं।
क्या है एडीसी:
एडीसी संचार तंत्र से जुड़ने के लिए वसूला जाने वाला शुल्क है। बीएसएनएल हर निजी ऑपरेटर से उसकी कुल बिल राशि के उस हिस्से का 0.75 प्रतिशत एडीसी के तौर पर वसूलती है, जिसे आपसी समझौते के तहत समायोजित किया जाता है। इसे तकनीकी भाषा में एडजस्ट ग्रोस रेवन्यू (एजीआर) कहा जाता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कॉल की इनकमिंग पर भी सरकार हर आईएलडी (अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार सेवा प्रदाता) सेवा देने वाली कंपनी से एक रुपए प्रति मिनट की दर से एडीसी वसूलती है। ट्राई ने पहले चरण में 0.75 प्रतिशत वाले एडीसी को एक अप्रैल से खत्म करने के निर्णय के अलावा अंतरराष्ट्रीय कॉल के लिए वसूली जाने वाली राशि को अप्रैल से अक्टूबर के बीच एक रुपए की जगह पचास पैसे प्रति मिनट की दर से वसूलने का निर्णय किया है। अक्टूबर के बाद यह राशि भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इसे वसूलने की वजह:
गांवों में लैंडलाइन और मोबाइल सेवा के लिए संचार तंत्र खड़ा करने और उन्हें संशोधित तथा छूट राशि के साथ (सबसडाईजड रेट) उपभोक्ताओं को देने के लिए बीएसएनएल हर निजी कंपनी से एडीसी वसूलती है। बीएसएनएल का कहना था कि उसे ग्रामीण क्षेत्रों में छूट सहित सेवा देने के लिए 8,774 करोड़ रुपए की जरूरत है। जिसकी वजह से इसे वसूला जा रहा है।
अब कैसे होगी भरपाई:
एडीसी के अलावा सरकार ऑपरेटरों से यूएसओएफ फंड भी वसूलती है। बीएसएनएल को लैंडलाइन नेटवर्क के लिए अब इस फंड से सहायता दी जाएगी। इस फंड से पहले चरण में बीएसएनएल को पहले तीन साल तक हर साल दो हजार करोड़ रुपए की सहायता की जाएगी। जिससे बीएसएनएल लैंडलाइन ग्राहकों को छूट रहित बेहतर सेवा देती रहे।