न्यूयार्क.‘जी आठ’ समूह देशों से अपील की गई है कि वे दुनिया के सबसे गरीब देशों में होने वाली संक्रमणशील घातक बीमारियों से निपटने के लिए एक कोष बनाने की पहल करें। बेहद गरीब देशों के उष्णकटिबंध इलाकों में होने वाली बीमारियां अक्सर घातक होती हैं। जार्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय से जुड़े होतेज सैबिन के अनुसार ‘जी आठ’ देशों द्वारा बनाया गए ‘ए ग्लोबल फंड टू फाइट नेगलेक्टेड ट्रीपिकल डिजीजज’ के जरिए इन घातक बीमरियों को फैलने से बचाया जा सकता है।
गौरतलब है कि आंतों में होने वाले कीड़े, सिस्टोसोमिएसिस, एलिफेंटेसिस और रिवर ब्लाईंजनेस जसी बीमारियों(एनटीडीज) का संक्रमण उष्णकटिबंधीय देशों में आम है।
जानकार मानते हैं कि यह बीमारियां इन गरीब देशों की अर्थव्यवस्था पर और भी बुरा असर डालती हैं। इस संबंध में पत्रिका ‘पीएलओएस’ में छपे एक लेख में सैबिन ने लिखा है, ‘‘दान में मिलने वाली दवाओं के जरिए हमने इन बीमारियों से निपटने में सफलता पाई है।’’
साल में एक बार इस तरह की दवाओं का वितरण जरूरत के मुकाबले कम है। ‘एनटीडीज’ बौर गरीबी से निपटने के लिए इस तरह के कोष का निर्माण सस्ता और बेहद जरूरी विकल्प है।
जानकारों के अनुसार धन जुटाने के लिए इस तरह के तंत्र का नक्शा नहले से ही मौजूद है। एड्स, तपेदिक और मलेरिया से लड़ने के लिए 2002 में बनाए गए वैश्विक कोष के जरिए 4.7 अरब डालर रुपये जुटाए गए।