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'मददगार है सरनेम'

मैंगलोर. हालिया राजनीतिक ढांचे को और खुला होने की जरूरत बताते हुए कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी ने माना कि उनका सरनेम गांधी असरदार है और इस वजह से भी उन्हें राजनीति में इस मुकाम तक आने में मदद मिली है।

मणिपाल कॉलेज में छात्रों के साथ चर्चा में भाग लेते हुए राहुल ने कहा कि हमारे देश में जो मौजूदा राजनीतिक ढांचा है, वह तकरीबन बंद प्रणाली जैसा है और यह विनाशकारी है। उन्होंने इसे खुला बनाने की जरूरत बताई और छात्रों से कहा कि आपकी मदद से यह बदलाव लाने के हम तैयार हैं।

जब उनसे पूछा गया कि अगर उनका सरनेम गांधी नहीं होता तो क्या वे राजनीति में होते, तब युवा पीढ़ी को भावी नेता कहते हुए राहुल ने कहा कि मैं राजनीति में आने की कोशिश करता लेकिन यह सच है कि फिर इतना आसान नहीं होता। अगर यह सरनेम मेरे साथ नहीं होता तो शायद काफी मुश्किल होती।

राजनीति में प्रेरणास्रोत महात्मा गांधी होने के सिलसिले में राहुल ने कहा कि कोई भी हो अगर कुछ अच्छी बात है तो मैं उसे चुन लेता हूं और बुरी किसी की भी नहीं।





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