गुड़गांव. एसीपी राजबीर सिंह की हत्या की गुत्थी उलझती ही जा रही है। पुलिस रोज रोज नए बयान दे रही है। राजबीर सिंह के घरवालों को लग रहा है कि पुलिस मामले की लीपापोती करने का प्रयास कर रही है। इस बात को घ्यान में रखकर राजबीर सिंह के परिवार वालों ने मर्डरकेस की सीबीआई जांच की मांग की है।
राजबीर सिंह की पत्नी को लग रहा है कि उनके पति को मारने के लिए गहरी साजिश की गई है। पुलिस पर आरोप लगाते हुए नर्वदा सिंह ने कहा कि मेरे पति जैसे पुलिस ऑफिसर को मारना एक छोटे से प्रापर्टी डीलर के बस की बात नहीं था जबतक की उसे किसी का सहारा नहीं मिला हो।
नर्वदा सिंह ने कहा कि उनके पति की हत्या के 6 घंटे बाद हमें सूचना दी गई अगर समय पर सूचना दी जाती तो शायद हम उन्हें बचा लेते।
वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने कहा है कि राजबीर की हत्या में इस्तेमाल किया गया बंदूक गैरकानूनी है। पुलिस ने जांच के बाद में पाया कि जिस बंदूक से राजबीर सिंह की हत्या की गई वह हरियाणा के मसिस्ट्रेट के नाम पर है लेकिन जब हरियाणा के मसिस्ट्रेट से संपर्क किया गया तो इसने उसी नंबर का गन दिखाया।
पुलिस ने कहा कि हमने हरियाणा के मसिस्ट्रेट के गन की जांच की है। उवकी गन वैघ है और उसका निर्माण 2003 में किया गया है। बाद में पुलिस ने भारद्वाज से बरामद गन को तोड़ा तो पाया कि गन का नंबर 1107 है जो कि 1991 मे बनी थी। पुलिस ने कहा कि भारद्वाज के पास से जो गन मिला है उसे गैरकानूनी रुप में जोड़ा गया है। गौरतलब है कि भारद्वाज को यह गन राजबीर ने हत्या के 3 दिन पहले ही दी थी।