चेन्नई:दक्षिण अफ्रीकी टीम के साथ आए सपोर्टिग स्टॉफ ने 34 डिग्री की गर्मी से खिलाड़ियों को बचाने का भरसक प्रयास किया,लेकिन उबलते सहवाग ने उनके तमाम प्रयासों को जाया कर दिया। 
चेपाक के गर्म मौसम के लिए सिर्फ सूर्य नारायण को दोष न दीजिए। मैदान में तापमान बढ़ाने के लिए सहवाग भी कसूरवार थे। शुक्रवार को उन्होंने यहां के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जमकर आग उगली। नतीजतन बेजान करार दी गई 22 यार्ड की यह पिच शुक्रवार को पूरे दिन जीवंत बनी रही।
इससे पहले दूसरे दिन के स्कोर बिना किसी नुकसान के 22 रन से आगे खेलने उतरी टीम इंडिया काफी सतर्क थी। लंच तक स्कोर बिना किसी नुकसान के 176 रन तक पहुंच चुका था। लंच और चाय के बीच भारत ने 24 ओवरों में 133 रन बनाए। लगता है कि सहवाग ने लंच में कुछ भी नहीं खाया तभी तो इसके तुरंत बाद वे भुखे शेर की तरह अफ्रीकी गेंदबाजों पर टूट पड़े।
खेल की समाप्ति तक सहवाग का स्कोर 309 रन था। उन्होंने अपना चौंथा दोहरा शतक सिर्फ 194 गेंदों पर ही पूरा कर लिया। तीसरे दिल चायकाल तक भारतीय पारी में 44 बार गेंद सीमा रेखा के पार गई। इसमें 37 बार तो वीरू ने ही गेंद को उसके अंजाम तक पहुंचाया।
दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की बदहाली इस बात से सहज ही समझी जा सकती है कि चाय से पहले के 10 ओवरों में उन्होंने 84 रन लुटाए। इस विश्राम के ठीक पहले का अंतिम ओवर नतीनी ने फेंका। इस अश्वेत गेंदबाज की पहली गेंद पर वीरू ने छक्का जमाया। दूसरी गेंद को कट शॉट लगाकर स्क्ेवयर सीमा रेखा के पार पहुंचाया। अंतिम गेंद पर फिर वीरू ने चौका जमाया। उनका यह रूप देख नतीनी समेत पूरी अफ्रीकी टीम को यह ब्रेक किसी वरदान से कम नहीं लगा होगा।
वीरू के खेल का यह अंदाज देखकर शायद ही किसी को आश्चर्य हो कि उनके अब तक लगाए गए चारों दोहरे शतकों में से तीन टेस्ट इतिहास के सबसे तेज दोहरे शतकों की सूची में शुमार हैं। सबसे तेज दोहरा शतक बनाने का रिकार्ड न्यूजीलैंड के नाथन एस्टल के नाम है। उनके बाद दूसरे और तीसरे नंबर पर वीरू के काबिज हैं।
दिमाग को स्थिर रखने को लेकर वीरू की पेडी उपटॉन के साथ हुई बातचीत का सकारात्मक नतीजा यहां देखने को मिला। दो साल पहले इंडीज के दौरे में उन्हें रूडी वेबेस्टर की सलाह का भी अच्छा लाभ मिला था। हालांकि इससे उनकी एक तेज आक्रमक बल् लेबाज ख्याति को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
चाय के बाद के सत्र में वीरू का सितम अफ्रीकी गेंदबाजों पर जारी रहा। हां उन्होंने थोड़ी राहत जरूर बख्शी। इससे लगा कि भगवान शायद अफ्रीकी प्रार्थना से पसीजे हों। इसके बाद भी रन दर 4.4 प्रति ओवर बनी रही। इस दौरान कई रिकार्ड उनके नाम होते चले गए।
भारतीय पारी के 100 वें ओवर में वह ऐतिहासिक क्षण आया जब सहवाग ने अपने कैयिर का दूसरा तिहरा शतक पूरा किया। सिर्फ 55 वें टेस्ट में वे लारा और ब्रेडमेन जैसे महान बल्लेबाजों की कतार में खड़े हो गए हैं।
मैं सोचता हूं कि दिन का सबसे अच्छा क्षण खेल के अंतिम ओवर के बाद आया। जबक अंपायर ने खेल समाप्त होने की घोषणा की। इससे अफ्रीकी खिलाड़ियों ने राहत की सांस ली। सभीने वीरू की पीठ थपथपाई। कप्तान ग्रेमी स्मिथ ने तो शायद उनसे कहा कि उनका यह रौद्र रूप देखकर वे कितना असहाय सा महसूस कर रहे थे। 
यहां सहवाग-जाफर के बीच हुई साझेदारी के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसी साझेदारी के कारण सहवाग को अपनी पारी यहां तक पहुंचाने में मदद मिली। पहले विकेट के लिए दोनों ने 213 रन जोड़े। इसके बाद दूसरे विकेट के लिए अब तक द्रविड़ और वीरू 255 रन जोड़ चुके हैं।