जयपुर. सरकार ने प्रदेश के 2 लाख 92 हजार पेंशनरों को पेंशन भुगतान का काम निजी क्षेत्र में सौंपने की तैयारी कर ली है। नई व्यवस्था के लिए बैंकों से विजुअल प्रजेंटेशन का काम पूरा किया जा चुका है। तकनीकी प्रक्रिया के बाद एक सेंट्रल पेंशन पेमेंट बैंक (सीपीपीबी) का चयन किया जाएगा, जो पेंशनरों को भुगतान करेगा।
पेंशनरों ने किया विरोध
राजस्थान पेंशनर्स एसोसिएशन ने नई व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए इसका विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेमशंकर सुमन का कहना है कि बरसों से चली आ रही पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव की क्या आवश्यकता आ गई। पुरानी व्यवस्था से सरकार पर कोई वित्तीय भार भी नहीं आ रहा। सरकार ने इस संबंध में पेंशनरों की राय जानना भी उचित नहीं समझा। नई व्यवस्था लागू होने से पेंशनरों को समय पर पेंशन मिलने, रिकॉर्ड ठीक कराने आदि कई समस्याएं आएंगी।
सेंट्रलाइज्ड पेंशन पेमेंट स्कीम लागू करने के लिए बैंकों से विजुअल प्रजेंटेशन लिया जा चुका है। तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही स्कीम लागू कर दी जाएगी।
—सुभाष गर्ग, सचिव (वित्त)
पेंशन भुगतान की नई व्यवस्था एक सप्ताह में पूरी कर ली जाएगी।
—शशि मधोक, निदेशक, पेंशन एवं कल्याण विभाग
पेंशन भुगतान की वर्तमान प्रक्रिया में बदलाव से कोई फायदा नहीं है। सरकार को इसे शुरू करने से पहले फिर से विचार करना चाहिए।
—महेंद्र सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत)
क्या होगी नई व्यवस्था
>> विभिन्न बैंकों की शाखाओं से पेंशनरों की सभी पत्रावलियां कोषाधिकारी (पेंशन) के पास मंगवाई जाएंगी।
>> पेंशनरों को निर्धारित फार्म में पूरी जानकारी कोषाधिकारी को देनी होगी, जो सीपीपीबी को भिजवाएगा।
>> पेंशनधारियों का एक जगह कंप्यूटरीकृत मास्टर डाटाबेस तैयार कराया जाएगा।
>> पेंशनरों को कोर बैकिंग सुविधा वाले बैंक में अपना खाता खोलना होगा।
पेंशनरों की आशंकाएं
>> अगर केंद्रीयकृत बैंक ने समय पर कोर बैंकिग प्रणाली से पेंशनरों के खाते में पेंशन राशि जमा नहीं कराई तो पेंशनरों का भुगतान अटक जाएगा।
>> सीपीपीबी की शाखाएं ग्रामीण इलाकों में नहीं होंगी तो पेंशनधारक को निकटवर्ती दूसरी शाखा में जाना होगा।
>> बैंक पेंशनर्स खातेदार को भी सामान्य खातेदार मानेगा, तो उसके लिए रियायती ऋण, शून्य बैलेंस व संयुक्त खाते आदि की सुविधाएं समाप्त हो जाएंगी।