जयपुर. जेडीए की आवासीय योजनाओं एवं नीलामी वाले मामलों में चार हजार से ज्यादा भूखंडों के आबंटन निरस्त हो सकते हैं। यह खतरा भूखंडधारियों द्वारा आबंटन के पांच साल बाद निर्माण नहीं कराने एवं नीलामी से भूखंड लेकर तीन साल में भी भवन नहीं बनाने वाली संस्थाओं पर मंडराया है।
राज्य सरकार ऐसे लोगों को अब मोहलत देने के मूड में नहीं है। जेडीए द्वारा जनवरी में भेजे गए उस प्रस्ताव को सरकार ने बैरंग लौटा दिया है, जिसमें पुनर्ग्रहण शुल्क लेकर अवधि पार भूखंडों में निर्माण के लिए एक साल की मोहलत देने का आग्रह किया गया था।
नगरीय विकास मंत्री ने ऐसे प्रकरणों के बारे में जानकारी मांगी है। जरूरी नहीं कि आबंटन के पांच साल बाद भी निर्माण के लिए और मोहलत दी जाए। सभी जोनों से इस प्रकार के मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है।
—आरएन मीणा,सचिव, जेडीए
पुनग्र्रहण शुल्क नियम
भूखंड आबंटन के पांच साल में निर्माण नहीं कराने पर आबंटन निरस्त कर जेडीए को उसका पुनग्र्रहण करने का अधिकार है। ऐसे मामलों में रियायत देने के लिए सरकार ने पुनग्र्रहण शुल्क का प्रावधान लागू किया हुआ है। इसके तहत आबंटन राशि का 5 प्रतिशत शुल्क के रूप में जमा करके निर्माण के लिए एक साल की मोहलत दी जा सकती है। इसी प्रकार नीलामी वाले मामलों में यह शुल्क वर्तमान आरक्षित दर का 2.5 प्रतिशत है। यह मोहलत नगरीय विकास मंत्री की अनुशंसा से ही संभव है।
अब भूखंडधारी परेशान
पुनग्र्रहण शुल्क जमा कराने के लिए सरकार द्वारा दी गई छूट दिसंबर 07 में समाप्त हो चुकी है। तब तक भूखंड आबंटन के पांच साल पूरे कर चुके लोगों की फाइलें अटक गई हैं। यही समस्या नीलामी में खरीदे गए भूखंडों के साथ आ रही है। पिछले तीन माह से जेडीए के हर जोन में ऐसे भूखंडों से जुड़ा हर काम बंद है। लोग सब डिविजन, लैंडयूज चेंज सहित विभिन्न कामों के लिए जेडीए में रोजाना चक्कर लगा रहे हैं।