बीकानेर. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगन्नाथ पहाड़िया धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को विधानसभा में पारित कराने की कोई जरूरत नहीं समझते।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगन्नाथ पहाड़िया का कहना है कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक जब एक बार राज्यपाल ने लौटा दिया है तो दुबारा उस विधेयक को लाने की जरूरत नहीं थी क्योंकि जब पूर्व में राज्यपाल ने लौटाया था तो कुछ सोच-समझकर ही लौटाया था।
बीकानेर आए पहाड़िया ने ‘भास्कर’ से बातचीत में कहा कि वर्तमान राष्ट्रपति और प्रदेश की पूर्व राज्यपाल ने विधेयक पर लंबे अध्ययन के बाद ही इसे लौटाया था। अब दुबारा जो विधेयक लाया गया है वह पूर्व विधेयक की तरह ही है। समाज कल्याण मंत्री मदन दिलावर के वक्तव्य के जवाब में पहाड़िया ने कहा कि सरकार के मंत्रियों में वैधानिक अज्ञानता है। राज्यपाल मनोनीत भले ही हो लेकिन वह संवैधानिक कुर्सी पर बैठा है। वह निर्णय जनहित में करता है।
चित्तौड़ में हुए दंगे और कफ्यरू के बारे में पहाड़िया ने कहा कि प्रदेश अब गुजरात के रास्ते चल पड़ा है। सरकार दंगों को रोकने में नाकाम हो रही है। आने वाले विधानसभा चुनाव के बाद की तस्वीर के बारे में पहाड़िया ने कहा कि सरकार के अब कुछ ही महीने शेष हैं। इस मौके पर पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.बी.डी.कल्ला, नगर परिषद के सभापति मकसूद अहमद समेत कई नेताओं ने पहाड़िया का स्वागत किया।
मोदी की निंदा
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ पहाड़िया ने नर्मदा का पानी राजस्थान में छोड़ने के मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नहीं आने की निंदा करते हुए कहा कि इससे यह लगता है कि गुजरात से राजस्थान को लंबे समय तक पानी नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मोदी नहीं चाहते ही नर्मदा का पानी राजस्थान को मिले। नर्मदा का पानी राजस्थान में लाने की योजना को कांग्रेस की देन बताते हुए कहा कि यह योजना पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने बनाई थी।
जिनका प्रभाव वे पहुंचे
हाल ही में कांग्रेस की एक बैठक में कुछ कांग्रेसी नेताओं के नहीं पहुंचने के सवाल पर जगन्नाथ पहाड़िया ने कहा कि रामनारायण चौधरी सहित जिन नेताओं का प्रभाव है वे सभी बैठक में पहुंचे। कोई यह नहीं कह सकता कि एक जाति विशेष के नेता बैठक में नहीं गए हैं। जो बैठक में नहीं पहुंचे उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।